गोंडा। कोविड संकट का डर भले ही लोगों में दूर होता दिख रहा है और सड़कों पर भीड़ जुट रही है, लेकिन माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थाओं के दावों के बावजूद अभिभावक सहमे हुए हैं। सोमवार को 600 से अधिक स्कूलों में शिक्षकों व प्रबंधन ने व्यवस्था का जोर दिखाया। स्कैनर आदि से जांच करके अभिभावकों को संतुष्ट करने की कोशिश की। इसके बावजूद अभिभावक अभी बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। उन्हें स्कूलों की व्यवस्था स्थाई तौर पर ऐसे ही रहने और कोरोना संक्रमण से बच्चों की सुरक्षा की फिक्र कम नहीं हो रही है। वैसे डीआईओएस अनूप कुमार का दावा है कि पहले दिन 20 फीसदी बच्चे आए हैं। फिलहाल अभी अभिभावक संशय में हैं।
जिले के 600 के करीब माध्यमिक स्कूलों को खोले जाने की तैयारी जोर शोर से हुई। सोमवार को डिप्टी डायरेक्टर माध्यमिक शिक्षा सूरज नरायन मिश्र ने फातिमा कालेज समेत आधा दर्जन कालेजों का निरीक्षण किया और व्यवस्था को परखा। स्कूलों की व्यवस्थाओं से अधिकारी तो संतुष्ट रहे लेकिन अभिभावक के मन का डर अभी दूर नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि सात महीने से चल रही कवायद के बाद भी कोरोना मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, ऐसे में स्कूल में किसके घर से कौन बच्चा आ रहा है यह स्थिति साफ न होने पर बीमारी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रोजवुड के प्रबंधक अमित पांडे ने बताया कि अभिभावक अभी रुचि नहीं दिखा रहे हैं उनमें संशय हैं। व्यवस्थाओं को देखने के बाद अभी 70 से 80 अभिभावकों ने ही सहमति दी है। करीब छह सौ से अधिक बच्चे स्कूल में हैं। यही स्थिति पूरे जिले की है। डीआईओएस की मानें तो कोरोना संकट में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। अभी कई तरह की आशंकाओं से अभिभावकों के मन में संशय है। वैसे पूरे जिले में 20 फीसदी के करीब बच्चों के स्कूल आने की जानकारी है जो धीरे-धीरे बढ़ेगी। स्कूलों में और बेहतर व्यवस्था देने पर जोर दिया जा रहा है।
स्कूलों के सामने अभिभावकों का विश्वास जीतने की चुनौती
स्कूलों में तैयारियां तो हो रही हैैं कि बच्चों को बुलाया जाए। कुछ ऐसे नामचीन स्कूल हैं जो सफल भी हो सकते हैं। लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं जिनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं। उनके स्कूलों में सब व्यवस्था हो भी जाए तो वहां की व्यवस्था ऐसे ही रहने पर अभिभावक संतोष नही जता पा रहे हैं। शहर के वेद प्रकाश कहते हैं कि स्कूल में पर्याप्त दूरी कमरे में संभव हैं, लेकिन बच्चे हैं आपस में मिल सकते हैं और इससे संक्रमण फैल सकता है। शशांक मिश्र कहते हैं कि बाजार में भीड बहुत हैं बच्चों को उसी से होकर स्कूल जाना है और सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं हो पा रहा है।
शहर में टूट रही सोशल डिस्टेसिंग से बिगड़ रहा माहौल
प्रशासन ने सब कुछ तो किया लेकिन कोरोना प्रोटोकॉल को शहरों और गांवों में लागू नहीं करा सका। स्थिति यह है कि मास्क का प्रयोग करने वालों तक की संख्या नियमित रूप से घटती दिख रही है। सोशल डिस्टेंसिंग नाम की चीज नहीं हैं, कहीं चेकिंग या कोई सख्ती जैसा माहौल नहीं है। बाजारों में भीड़ पर भीड़ है, ऐसे में आम अभिभावक अपने बच्चों को लेकर काफी चिंतित है और इसी के कारण माहौल बिगड़ रहा है।
स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयास जारी है। बच्चों को अभिभावकों की सहमति से ही बुलाया जा रहा है, 20 फीसदी बच्चे आना शुरू कर दिए हैं। जल्द ही स्थिति में और सुधार होगा। -अनूप कुमार, डीआईओएस
दस प्रतिशत भी नहीं रही बच्चों की उपस्थिति
मुजेहना (गोंडा)। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का डर अभी भी सता रहा है। शासन के निर्देशानुसार सोमवार से हाईस्कूल और इंटर के छात्रों के पठन-पाठन के लिए विद्यालय खोल दिया गया है। विद्यालयों द्वारा कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त साधन अपनाए गए हैं, लेकिन फिर भी इन विद्यालयों को छात्रों की 10 प्रतिशत भी उपस्थिति प्राप्त नहीं हो सकी है। कस्बा धानेपुर स्थित भैया हरि भान दत्त इंटर कॉलेज में हाईस्कूल और इंटर के बच्चों के पढ़ने के लिए दो शिफ्ट में आने की व्यवस्था की गई है जिसमें प्रात: काल की शिफ्ट में 9-10 के छात्र और दूसरी शिफ्ट दोपहर बाद लगाई गई है। प्रात: काल की शिफ्ट में 9 और 10 में 650 पंजीकृत छात्रों में से मात्र 42 छात्र ही विद्यालय आए थे ।इसी प्रकार माधवगंज के चंद्रशेखर शुक्ला कृषक बालिका इंटर कॉलेज में भी यही व्यवस्था अपनाया गयी है। पंजीकृत 305 छात्राओं में से मात्र 16 बच्चियां ही विद्यालय आई थी हालांकि विद्यालय की ओर से बाकायदा कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। बच्चियों को थर्मल स्क्रिीनिंग और हाथ सैनिटाइज कराकर ही परिसर में प्रवेश दिया जा रहा था। प्रधानाचार्य नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि सूचना के अभाव में बच्चियां नहीं आई हैं। कक्षाएं प्रारंभ हो गई हैं इसकी सूचना बच्चियों को पहुंचाई जा रही है।