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बदलता रहा निजाम, चलता रहा हाफिज का सिक्का

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हर हुकूमत में रही हाफिल अली की हनक
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गोंडा। जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम कल्यानपुर निवासी हाफिज अली का सत्ता के रसूख से बालू के अवैध खनन का सिक्का चलता रहा। बालू खनन का कारोबार हाफिज अली को पुश्तैनी धंधे के रूप में मिला था।

लेकिन उसने जब सत्ता के लोगों के शरण में रहकर कारोबार को बढ़ाया तो वह देखते ही देखते सफेद रेत के काले कारोबार का बादशाह बन गया। इस काले कारोबार को प्रोटक्शन देने के लिए वह खुद सफेदपोश चोले में गया।
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उसके इस काम में जिले के एक पूर्व मंत्री ने बड़ी भूमिका निभाई। गांव में शानदार मकान बनवाने के साथ नवाबगंज कस्बे में एक इंटर कॉलेज बनवाया। इसके अलावा एक मैरेज हाल भी बनवा दिया।

इसके इस काम में इसके भाई भी सहयोगी रहे। लेकिन जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो हाफिज ने खुलकर एक नेता का समर्थन किया। इसके अलावा हाफिज अली के इस काली कमाई से कई लोगों को फायदा पहुंचता था।

इसमें नेता व अधिकारी और पुलिस के लोग भी शामिल थे। बताया जाता है कि हाफिज अली जिसकी सत्ता के रसूख से अपने कारोबार को बढ़ाकर इतने व्यापक पैमाने पर किया था उन्हें वह चुनाव के दौरान बड़ी फंडिंग भी करता था।

लेकिन जब इसके नाम से शिकायतें बढ़ी और मामले दर्ज हुए तो वह भूमिगत हो गया। मामला एनजीटी तक पहुंचने और इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई न होने से प्रशासनिक आला अधिकारियों को फटकार लगने के बाद प्रशासन ने इसकी सम्पत्ति को अटैच कर लिया।
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इसके बाद हाफिज ने जिले से अपने इस काम से हाथ खींच लिया और बाहर रहने लगा। बताया जाता है कि वह गैर जनपद में अब रहकर दूसरे लोगों के नाम से फर्म बनवाकर बालू के ही कारोबार में लगा है। बताया जाता है कि सप्ताह में एक दो दिन के लिए ही गांव पर आता है। कब आया कम चला गया इसका भी लोगों को पता नही चल पाता है।
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