फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेत काटकर नकहरा, काशीपुर की ओर बढ़ी घाघरा

विज्ञापन
विज्ञापन
नकहरा व काशीपुर में घुसने को बेताब घाघरा
विज्ञापन

24 घंटे में एक मीटर बढ़ा नदी का जलस्तर, खतरे के निशान से सिर्फ 88 सेमी नीचे
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज (गोंडा)। हफ्ते भर से हो रही बरसात के चलते घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के नजदीक पहुंच गया है। बांध तो इस बार रहा नहीं, ऐसे में किसानों के खेतों को काटते हुए घाघरा का पानी अब तेजी से नकहरा और काशीपुर गांव की ओर बढ़ रहा है। नकहरा और काशीपुर में लोग फिलहाल तो रह रहे हैं, लेकिन जिस तरह से जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है उससे लगता है कि आने वाले 48 घंटों में घाघरा नदी का पानी गांवों में घुस सकता है। वहीं नदी खतरे के निशान से महज केवल 88 सेमी नीचे दूर है।
घाघरा नदी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। एक तरफ बारिश तो दूसरी ओर नदी में आई बाढ़ की आफत से लोगों को सूझ ही नहीं रहा कि वह क्या करें और क्या न करें। बुधवार को पिछले वर्ष कटे बांध के हिस्से को लांघ कर घाघरा नदी ने अब किसानों के उन खेतों की कटान शुरू कर दी है। जिसमें वह फसल बोया करते थे। जबकि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 88 सेमी नीचे हैं। ऐसे में आशंका है कि अगर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा तो बाढ़ का पानी यहां के गांवों में घुसना शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

इससे करनैलगंज तहसील के ग्राम काशीपुर, नकहरा, प्रतापपुर, रायपुर, घरकुंइया, परसावल सबसे पहले प्रभावित होंगे। लगातार हो रही बरसात से मंगलवार को नदी का जो जलस्तर 104 मीटर के इर्द-गिर्द था, वह दो ही दिन में 105.206 तक पहुंच गया है। जबकि एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर नदी के खतरे का निशान 106.07 है। जिससे नदी अब सिर्फ 88 सेमी ही नीचे है। अपने रौद्र तेवर के लिए पहचानी जाने वाली घाघरा नदी की खासियत है कि यह पहले नीचे-नीचे कटान करती है, इसके बाद जमीन के एक बड़े से हिस्से को अपने आगोश में ले लेती है। जिससे लोगों को अपने घर-मकान कटने का अंदेशा है। ग्रामीणों की मानें तो अगर नदी का जलस्तर इसी तरह से बढ़ता रहा तो आने वाले 48 घंटों में इसका पानी कई गांवों को अपनी आगोश में ले लेगा।

इनसेट
बंधे पर बनाया आशियाना
पिछले साल बंधा कट जाने के बाद घाघरा की धारा के मुुहाने पर बसे गांव नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुंइयां, मांझा रायपुर, परसावल के लोगों ने सुरक्षित स्थान के लिए बंधे को ही अपना आशियाना बना लिया हैै। यहीं पर वह अपने रहने-खाने के सामानों की व्यवस्था में लगे हैं। हालांकि तीन दिनों से लगातार हो रही दिन-रात बारिश से उनकी दिक्कतें काफी हद तक बढ़ी हुई हैं क्योंकि ताल, पोखरे, गडढे, पहले ही भर चुके हैं। ऐसे में उन्हें जानवरों के चारे के भी परेशान होना पड़ रहा है।
विज्ञापन


इनसेट
3 बाढ़ चौकियां सक्रिय, लगाए 13 कर्मचारी
बाढ़ से लोगों को राहत दिलाने के लिए क्षेत्र में इस बार 11 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं इसमें से पाल्हापुर, गौरासिंहनापुर व पसका की बाढ़ चौकियों का सक्त्रिस्य कर दिया गया है। जिसके लिए 13 कर्मचारी लगाए गए हैं। जबकि बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने 390 नावों के साथ ही 650 नाविकों का चयन किया है। जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जाएगी। बता दें कि पिछले साल आई बाढ़ में प्रशासन ने बाढ पीडितों के लिए लंच पैकेट, तिरपाल, लईया और चना, राहत किट, मोमबत्ती, माचिस, एवं गैलन पर कुल 32.74 लाख रुपए खर्च किए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें