बस एक मीटर बचा चरसड़ी बांध, खाली होने लगे गांव
गोंडा। घाघरा के तेज बहाव ने बुधवार को चरसड़ी बांध का करीब तीन मीटर चौड़ा हिस्सा काटकर अपनी धारा में मिला लिया। अब बस मात्र एक मीटर बांध का हिस्सा ही बचा है जो कभी भी कट सकता है।
इससे करीब सवा सौ गांव सीधे बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। इससे एक लाख आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। जिला प्रशासन ने बांध की नाजुक हालत को देखते हुए गांवों को खाली कराने का निर्देश दिया है।
घाघरा नदी के घटते जल स्तर ने ग्राम परसावल नैपुरा, बांसगांव व बेहटा के सामने जमकर तबाही मचाई है। जहां सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि को काटकर घाघरा ने सैलाब में शामिल कर लिया है।
प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए बांध के बेहद खतरनाक स्थिति को देखते हुए आस-पास के गांव को खाली करने तथा ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने के साथ ही बांध के पास न जाने का अनाउंसमेंट करा दिया है।
काशीपुर तथा नकहरा गांव के लोग अब गांव को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी में भी है। करनैलगंज इलाके के गांव नकहरा के सामने नया बनाया गया अस्थाई बांध का करीब सौ मीटर से अधिक हिस्सा मंगलवार को दरार आ जाने से क्षतिग्रस्त हो गया था।
जिसे बचाने के लिए सिंचाई विभाग लगा था। मगर बुधवार दोपहर तक तीन मीटर चौड़ा और लगभग सौ मीटर की लंबाई में बांध का हिस्सा घाघरा में समा गया। अब बांध का अधिकतर हिस्सा रह रह कर नदी में कट कर गिर रहा है। रुक रुक कर हो रही लगातार बारिश से समस्या और विकट हो चली है।
बुधवार की सुबह एल्गिन ब्रिज पर ली गयी माप के अनुसार अब भी घाघरा खतरे के निशान से करीब 6 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। तो वहीं नदी में पानी का डिस्चार्ज 1 लाख 72 हजार 926 क्यूसेक बना हुआ है।
विगत कई दिनों से घाघरा कभी नीचे तो कभी ऊपर हो रही है। नदी की धारा अब नकहरा गांव की ओर रुख करके बह रही है। इसके अलावा अब नदी ग्राम बेहटा के सामने चरपुरवा के पास खेतों में कटान करने में जुट गई है।
जहां तमाम खेती योग्य जमीन में नदी तेजी से कटान कर रही है और किसानों की खड़ी फसल गन्ना, परवल, धान नदी में समा रहा है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि बांध पर नदी की धारा का दबाव लगातार बना हुआ है। बांध को बचाने के लिए जिस सामग्री की आवश्यकता होती है, वह सामग्री बांध पर आने में परेशानी हो रही है।
गांव के कच्चे रास्तों में बरसात के चलते पानी भरा है और बांध पर एक साथ दो वाहन नहीं आ जा सकते। जिससे सामग्री को लाने में अवरोध और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है।
बुधवार को सुबह से ही सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता आरपी सिंह, अधिशासी अभियंता वीएम शुक्ला, सहायक अभियंता अमरेश सिंह, अवर अभियंता एमके सिंह के साथ ही प्रशासन के अधिकारी अपर जिलाधिकारी गोंडा तथा एसडीएम करनैलगंज गुलाम सरवर, तहसीलदार मिश्री सिंह चौहान, नायब तहसीलदार सहित तमाम अधिकारी बांध पर मौजूद रहे।
एसडीएम गुलाम सरवर ने बताया कि बांध में लगातार कटान हो रही है। नदी का दबाव बांध पर बना हुआ है। बांध को बचाने की सारी कोशिशें की जा रही हैं। उसके बावजूद बांध के आस-पास के गांव में अलर्ट जारी कर दिया गया है। गांव को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने के लिए कहा गया है।
शराब पीकर बचाव में लगे कर्मियों को धमकाया
बांध पर दिन रात रहकर बांध के बचाव कार्य में लगे सिंचाई विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों पर गांव के कुछ दबंगों ने दादागिरी शुरू कर दी है। बताया जाता है मंगलवार की रात कुछ लोग शराब के नशे में करीब 12 बजे के आसपास बांध पर पहुंचे और कार्य कर रहे मजदूरों को गाली देकर भगा दिया।
यही नहीं वहां कार्य करवा रहे अभियंता से भी अभद्रता किया। जिससे काफी देर तक बांध पर कार्य बंद रहा। यह सब तब हुआ जब बांध पर स्थानीय पुलिस के एक दरोगा व सिपाही मौजूद थे पर वो भी तमाशबीन बने रहे। इस बात की शिकायत सिंचाई विभाग कर्मियों ने उच्चधिकारियों से की है। कोतवाल ला एंड आर्डर अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि अगर तहरीर मिली तो कार्यवाही की जायेगी।
सरयू का पानी नवाबगंज के कई गांवों में घुसा
बुधवार को नवाबगंज के जैतपुर माझा सहित अन्य कछार वाले गांवों में सरयू का पानी घुस गया। बुधवार को एसडीएम तरबगंज सौरभ भट्ट ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और बाढ़ से बचाव के लिए बाढ़ चौकियों पर लगे कर्मियों को एलर्ट किया।
उन्होंने पर्याप्त नावें लगाने के निर्देश दिए और लोगों से अपील की है कि वे नदी से दूर रहें। सरयू का पानी दत्तनगर, ढेमवाघाट, ब्योंदामाझा, साकीपुर, तुलसीपुर माझा, जैतपुर माझा व दुर्गागंज माझा में करीब 500 बीघे जमीन बाढ़ में समा गई है। सबसे अधिक नुकसान दत्तनगर गांव में हुआ है। इस क्षेत्र में करीब दो दर्जन गांव प्रभावित हो गए हैं।