53 लाख पौधरोपण से आएगी मंडल में हरियाली
गोंडा। मंडल को पौधरोपण के जरिए हरा-भरा रखने और इसी बहाने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अबकी बार सरकार एग्रो फारेस्ट्री में किसानों के लिए एक ऐसी योजना लेकर आई है, जिसमें उन्हें पौधरोपण पर सब्सिडी भी दी जाएगी।
अगर कोई किसान अपने खेत की मेड़ पर पौधरोपण करता है तो उसे 35 रुपये और अगर फसल के साथ खेत में पेड़ लगाता है तो उसे 28 रुपये प्रति पेड़ की दर से भुगतान किया जाएगा। शर्त सिर्फ इतनी है कि पेड़ लगाने के बाद अगले चार साल तक उसकी देखरेख का सारा काम किसानों को स्वयं ही करना होगा, ताकि पेड़ जिंदा रहे।
तभी जाकर उसे चार साल तक इसकी सब्सिडी मिल पाएगी। वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रदेश सरकार ने जो 9 करोड़ पौधरोपण का टारगेट तय किया है, उसके सापेक्ष मंडल में 53 लाख पौधे रोपे जाएंगे। जिसकी तैयारी वन विभाग ने अपनी नर्सरियों में बड़े स्केल पर पौधरोपण को लेकर शुरू भी कर दी है। पेश है रिपोर्ट-
आंवला, अर्जुन, बबूल, बहेड़ा, बांस, बेल, बेर, दालचीनी, गम्हार, गिंगो, अमरूद, कटहल, जामुन, कदम्ब, करौंदा, खैर, किन्नू, नींबू, मालाबार, नीम, मलबरी, पापुलर, सागौन, सहजन, शीशम, सिरस, शहतूत व तेजपत्ता
खेत की मेड़ पर पौधरोपण कराने वाले किसानों को पहले साल 14 रुपए तो अगले तीन साल तक 7-7 रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। जबकि फसल के साथ पौधरोपण कराने वाले किसानों को पहले साल प्रति हेक्टेयर 500 पौध पर (28 रुपये की दर से) 14000 रुपये प्रति हेक्टेयर तो दूसरे साल 11 रुपये 20 पैसे की दर से 5600 रुपये, तीसरे और चौथे साल 5 रुपये 60 पैसे की दर से 2800 रुपए मिलेंगे।
किस जिले में कितने होगा पौधरोपण
जिले का नाम वर्ष 2017-18 में पौधरोपण वर्ष 2018-19 का लक्ष्य
गोंडा 5.62 लाख 11.80 लाख
बलरामपुर 2.10 लाख 4.41 लाख
बहराइच 7.12 लाख 14.95 लाख
श्रावस्ती 10.47 लाख 21.90 लाख
कुल योग 25.31 लाख 53.06 लाख
वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए प्रदेश सरकार ने पहले से 9 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य तय कर रखा है। इस 9 करोड़ में 53 लाख पौधे अकेले देवीपाटन मंडल में लगाए जाने हैं। इसके लिए वन विभाग ने पहले से अपनी जमीनें चिन्हित कर रखी हैं, जबकि इसी टारगेट में एग्रोफारेस्ट्री के तहत किसानों से प्राप्त होने वाले आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। जिस हिलाज से एग्रोफारेस्ट्री में 53 लाख पौधरोपण की कुल सब्सिडी 18 करोड़ रुपए के करीब बनती है।
एग्रोफारेस्ट्री में पौधरोपण का काम तो पहले भी होता रहा है, लेकिन अबकी बार सरकार एग्रोफारेस्ट्री के जरिए केवल हरियाली बिखेरने ही नहीं जा रही, बल्कि इस मिशन से उसकी मंशा किसानों की आय दोगुनी करने की भी है।
यानि जो पौधा किसान अपने खेत व खेत की मेड़ पर लगवाता है, सरकार उस पौधे के एवज में किसान को अगले चार साल तक उसकी सब्सिडी देता रहेगा। और यही पेड़ जब बड़े हो जाएंगे, तो अन्नदाता किसानों की और जरूरतों को पूरा करेंगे। साथ ही साथ हरियाली भी बनी रहेगी। जिसके मद्देनजर ही सरकार ने अगले साल होने वाले पौधरोपण का यह पूरा मसौदा तैयार किया है।
अगले साल होने वाले पौधरोपण के लिए सरकार ने एग्रोफारेस्ट्री का जो मसौदा तय किया है। उसके तहत किसानों का रजिस्टे्रशन अगले एक-दो महीनों में होने लगेगा। किसानों को अपने खेत, जहां उसे पौधरोपण करवाना है कि पूरी खतौनी के साथ इसका आवेदन वन विभाग में करना होगा।
ताकि जिस समय पौधरोपण की प्रक्रिया चालू हो, उस समय उसके दिए गए आवेदन के मुताबिक पौधे लगवाए जा सकें। मंडल को शासन स्तर पर वैसे तो अभी केवल 53 लाख का ही टारगेट मिला है।
लेकिन जैसे-जैसे किसानों से आवेदन मिलते जाएंगे, वैसे-वैसे पौधरोपण का टारगेट बढने की आशंका है। मौजूदा वक्त अगर सारे 53 लाख पौधे मंडल के किसान लगाते हैं तो उन्हें इन पौधों के एवज में अगले चार साल तक 18 करोड़ रुपए सब्सिडी के तौर पर मिलेगी।
किसानों की आय दोगुनी करने के साथ ही जिलों में हरियाली बिखेरने के लिए सरकार एग्रोफारेस्ट्री में अबकी बार सब्सिडी की योजना लेकर आई है। जिसमें खेत व खेत की मेड़ पर पेड़ लगाने पर किसानों को सरकार चार साल तक पेड़ के जीवित रहने पर उन्हें सब्सिडी देगी। इसके लिए किसानों को गड्डा खोदने से लेकर निराई, सिंचाई, गुड़ाई, कीटनाशक, खाद, पौध सुरक्षा और पौधे की पूरी देखरेख की जिम्मेदारी किसानों को खुद ही निभानी होगी।-एपी त्रिपाठी, मुख्य वन संरक्षक, देवीपाटन वृत्त