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घाघरा में छोड़ा दो लाख क्यूसेक पानी, फिर बाढ़ की आफत 18-23-01

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घाघरा में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से हड़कंप
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लगातार बढ़ रहा पानी, हो रही कटान
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। मंगलवार को घाघरा में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से हड़कंप मच गया। जिससे बुधवार को करनैलगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। पानी एल्गिन-चरसडी बांध से सटे इलाकों में पहुंचना शुरू हो गया है। मंगलवार को घाघरा का जलस्तर 105.906 था तो बुधवार को नदी का जलस्तर बढकर 106.046 हो गया। वहीं घाघरा ने एल्गिन-चरसड़ी बांध के कट वन व कट टू में भी कटान शुरू कर दिया है। बांध को बचाने के लिए पेड़ों की टहनियां, बालू भरी बोरियां व ईंटों को बांध के किनारे डाला जा रहा है। यदि घाघरा का जलस्तर बढ़ता रहा तो जिन गांवों से पानी उतरने लगा था उन गांवों में फिर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
बाढ़ से प्रभावित गांव नकहरा, काशीपुुर, प्रतापपुर, दिवली, भटपुरवा, गौरा सिंहपुर, अतरसुइया, मोहम्मदपुर गड़वार के प्रभावित करीब 42 मजरों से पानी घटने लगा था। घरकुंइयां, पूरे अंगद, बाबा मांझा, बहुवन मदार मांझा, शिवगढ़ के 26 मजरों तथा परसावल, कमियार, नैपुरा, रायपुर, बेहटा के सभी 34 मजरों की स्थिति जस की तस बनी हुई थी। बुधवार को पानी बढ़ने से उन गांवों की ओर पुन: बाढ़ का पानी सरकने लगा है जहां से पानी कम हो रहा था। बाढ़ प्रभारी तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि मंगलवार को दो लाख क्यूसेक पानी पानी बैराजों से छोड़ा गया था वह पानी घाघरा में आने लगा है जिससे नदी का जलस्तर बढ़ा है। उससे क्षेत्र में गुरुवार तक पानी बढ़ने की आशंका है। जो मजरे पानी से खाली होने लगे थे उनमें फिर पानी आस्त्रत्त् सकता है, लगातार निगरानी कराई जा रही है।
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इनसेट
बांध में शुरू हो गई कटान
एल्गिन-चरसडी बांध की जैसे सामत आ गई हो। दोनों कटों में घाघरा की कटान तेज हो गई है। तो बांध के हिस्से को बचाने की जददोजहद भी तेज कर दी गई है। लोहे के तार एवं ब्रिक रोरा से बांध को बचाने के लिए बीस ट्रैक्टर ट्राली के साथ मजदूरों को लगाया गया है। घटते-बढ़ते जलस्तर से नदी ने बांध में कटान शुरु कर दिया है तथा जिओ टयूब को घाघरा की धारा में जाने के बाद नदी का रुख तेजी से बदल रहा है। वहीं बांध में कटान होने से लगातार दायरा बढ़ रहा है। बुधवार को कट-वन का करीब 20 मीटर एवं कट-टू का करीब 15 मीटर हिस्सा नदी में कट कर समा गया। मुख्य बांध के बाद बने रिंग बांध का अवशेष जो गांव की ओर पानी को जाने से रोकने में मददगार साबित हो रहा था उसका पिछले 24 घंटे में करीब 60 मीटर हिस्सा कट कर नदी में चला गया। जिससे पानी की धारा लगातार बदल रही है। घाघरा नदी का जल स्तर कभी तेजी से घटता है तो कभी अचानक पानी बढ़ता है। जिससे घाघरा की कटान बांध में तेज हो गई है। बांध के कट-वन एवं टू को बचाने के लिए लगाई गई 20-20 मीटर की चार जिओ टयूब पहले ही नदी में समा चुकी है। जिससे पानी का टकराव सीधे बांध से होने लगा है। कट-वन में करीब 15 मीटर तो कट-टू में करीब 100 मीटर हिस्से में तेज कटान हो रही है। बांध में कटान रोंकने के लिए प्रशासन द्वारा बांध के किनारे बालू भरी बोरियां एवं ईंटों को डालने के साथ ही पेड़ काट कर डाले जाने का कार्य किया जा रहा है।
इनसेट
बढ़ा संक्रामक रोगों का खतरा
बुखार, पेटदर्द व दस्त के करीब 300 मरीज प्रतिदिन निकल रहे
बाढ़ के पानी से खाली हो रहे मजरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। गांवों में हर तरफ सड़ांध एवं कीचड़ ही कीचड़ है। मौसम के बदलते मिजाज व गर्मी की वजह से अनेक प्रकार की बीमारी फैलने की आशंका प्रबल हो गई हैं। अभी लोग बुखार, पेट दर्द एवं दस्त के साथ शरीर में दाने निकलने की बीमारी से पीड़ित हुए हैं। जिनका चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा है। वहीं यदि नदी का जल स्तर बढ़ा तो लोगों की समस्याएं बढ़ जायेंगी और प्रभावित गावों के मजरे पुन: बाढ़ की चपेट में आ जायेंगे। उधर सीएचसी अधीक्षक डा. पीएन राय ने बताया कि लगातार बाढ़ चौकियों एवं गांवों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा तीन चिकित्सकों की टीम प्रभावित गांवों में भ्रमण कर रही है। प्रतिदिन करीब तीन सौ से अधिक बाढ़ पीडितों का इलाज टीमों द्वारा किया जा रहा है।
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इनसेट
पीड़ित करते रहे इंतजार, नहीं मिली राहत किट
बाढ़ से पीड़ित लोग राशन किट के वितरण का इंतजार करते रहे मगर उन्हें राशन किट नहीं मिली। बाढ़ राहत केंद्र पाल्हापुर पर ग्राम काशीपुर के मजरा हनुमान पुरवा, हरिपाल पुरवा एवं मल्लाहन पुरवा में अभी तक राशन किट का वितरण नहीं किया जा सका है। मंगलवार को बाढ़ राहत केंद्र पाल्हापुर पर तीनों मजरों के करीब सवा सौ से अधिक लोग सुबह से शाम तक किट लेने के लिए बैठे रहे। कमली देवी, प्रहलाद, ओंकार, सेवक, राजकरन, मनीराम, सरजू एवं गुरुप्रसाद शोभवती, रामा देवी, मंगलदेई, शांती, सहित केंद्र पर मौजूद सभी बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि हल्का लेखपाल ने मंगलवार को बुलाया था। मगर उन्हें श्किट नहीं मिली। लेखपाल स्वामीनाथ तिवारी ने बताया कि स्टाक में किट कम थी प्रयाप्त राशन किट आने पर वितरण किया जायेगा। तहसीलदार रमेंश बाबू ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी 40 नावें लगी हैं। बाढ़ का पानी कम हो रहा था। इसलिए लंच पैकेट बनने का काम बंद करा दिया गया है। राशन किट की व्यवस्था कराई जा रही है। जल्द ही किट बाढ़ राहत केंद्रों पर पहुंच जायेगी। जिन लोगाों को किट नहीं मिल पाया है उन्हें उपलब्ध करवाया जायेगा। बाढ पीड़ितों द्वारा भोजन का पैकेट लेने से इंकार किया जा रहा है तथा किट की मांग की जा रही है। पानी बढ़ने पर या बाढ की स्थिति आने पर पुन: लंच पैकेट चालू कराया जाएगा।
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