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चकरसूल से भी बड़ा जख्म दे गया बरेली बस हादसा

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चकरसूल से भी बड़ा जख्म दे गया बरेली बस हादसा
8 साल पहले बालू लदे ट्रक से भिड़ी थी अयोध्या पैसेंजर
रेल हादसे में 10 तो बस बरेली बस हादसे में अब तक 14 की मौत की पुष्टि
राजेश तिवारी
गोंडा। नवाबगंज के चकरसूल में आज से ठीक 8 साल पहले हुई रेल दुर्घटना में जहां जिले के 10 लोगों को एक साथ अपनी जान गंवानी पड़ी थी। तो वहीं बरेली में बीते रविवार की रात हुए हादसे में यहां के 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। आने वाले दिनों में जिले से इस हादसे में मरने वाले लोगों की संख्या अभी और कितना इजाफा होगा। इसका भी कोई पता नहीं है, क्योंकि जब तक बस से मिले 24 बरामद कंकालों का मिलान परिवारीजनों के डीएनए रिपोर्ट से नहीं हो जाता। कुछ भी कह पाना नामुमिकन है।
8 साल पहले एक जून 2009 को नवाबगंज-मनकापुर मार्ग पर स्थित मानव रहित समपार फाटक 15सी पर हुई टे्रन दुर्घटना के बाद वहां के नजारे ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया था। इस हादसे में बालू लदे ट्रक से टकराने के बाद अयोध्या-गोरखपुर पैसेंजर पूरी तरह से खून से नहा गई थी। चूंकि उसी के एक दिन बाद अयोध्या में कार्तिक पूर्णिणा का स्नान था। जिसके लिए ट्रेन में जगह न मिलने पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु ट्रेन के इंजन पर सवार होकर अयोध्या जा रहे थे। ट्रक से टकराने के बाद मौके पर जहां 7 लोगों की जान चली गई थी, तो वहीं हादसे में 45 से ऊपर लोग घायल हुए थे। जिसमें से 10 लोगों की बाद में मौत हो गई।
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वहीं रविवार की रात बरेली में हुए भीषण बस हादसे में जिन लोगों के मरने की बात हो रही है। उसकी संख्या बिना डीएनए रिपोर्ट आए ही जिले से 14 हो गई है। इसमें बेलवा नोहर के दो परिवारों के 6 लोग, नरायनपपुर मर्दन में एक ही परिवार के पांच लोग, कटराबाजार में धोबहाराय गांव के एक परिवार के दो लोग तो मोहल्ला कटहरिया के एक युवक का नाम अभी तक पता चल पाया है।
जबकि बस से कुल 24 कंकाल बरामद हुए हैं। वहीं गोंडा के ही 7 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इस हादसे में एक साथ गई इतनी जानों से जहां मरने वालों के परिवार में मातम का माहौल है तो वहीं इन गांवों के आसपास के गांवों में भी इस हादसे को लेकर लोगों की आंखे नम हैं। बावजूद इसके पीड़ित परिवारों को लेकर क्या प्रशासन और क्या रोडवेज प्रबंधन दोनों ही बेपरवाह हैं।
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इनसेट
अब तो बस से चलने में भी लगने लगा है डर
बरेली में गोंडा डिपो की बस के साथ बरेली में हुए हादसे के बाद जिले में बस से यात्रा करने वाले लोग भी अब डरने लगे हैं। ऐसा सिर्फ उस हादसे की वजह से ही नहीं है, इसके पीछे एक बड़ी वजह जिले की कंडम बसें भी हैं। जिनके मेंटीनेंस के नाम पर जिले में सिर्फ खानापूरी ही होती रही है। किसी भी बस में आग से बचाव के न तो कोई इंतजाम हैं, न ही बस से बाहर निकलने की माकूल व्यवस्था।
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