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मंडल के 5 पावर प्लांटों का परचेज एग्रीमेंट निरस्त

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खरीद निरस्त होने से बिजली के लिए हाहाकार
5 चीनी मिलों से पावर कारपोरेशन को मिलती थी 195 मेगावाट बिजली
मंडल के चार जिलों में हर रोज होती 350 मेगावाट बिजली की खपत
राजेश तिवारी
गोंडा। मंडल में बिजली का उत्पादन करने वाली पांच चीनी मिलों का परचेज एग्रीमेंट निरस्त होने से बिजली के लिए हाहाकार मच गया है। अभी तक इन पांच पावर प्लाटों से पावर कारपोरेशन को 195 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल जाती थी। जिसका ज्यादातर उपयोग मंडल के चार जिलों में ही होता था। लेकिन बिजली की खरीददारी को लेकर किया गया एग्रीमेंट निरस्त होने के बाद चीनीमिलों ने बिजली का उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया है।


इनसेट
7 साल से 8 रुपये में खरीदी जा रही थी बिजली
वर्ष 2010 में बिजली खरीद को लेकर जो एमओयू (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग) पावर कारपोरेशन ने मंडल की पांच चीनीमिलों से साइन किया था। उसमें प्रति यूनिट बिजली का रेट सवा 7 से सवा 8 रुपये के बीच था। इसी दर पर पिछले 7 वर्षों से मंडल में बिजली की खरीद 2 आईपीपी व 3 कोजेन प्लांटों से पावर कारपोरेशन करता आ रहा था। जिसे हाल में पावर कारपोरेशन ने रद्द कर दिया है। इसके पीछे मंहगी बिजली खरीद कर उसे कम दाम में बेंचना मुख्य कारण बताया जा रहा है।
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इनसेट
मंडल में हर दिन खपती 350 मेगावाट बिजली
देवीपाटन मंडल के चार जिलों में बिजली की औसत खपत एक दिन में 350 मेगावाट है। जिसके सापेक्ष अभी तक 195 मेगावाट बिजली दो आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) व 3 कोजेन (को जेनरेशन) प्लांटों से पावर कारपोरेशन को मिल जाया करती थी। लेकिन मंगलवार को पांच चीनी मिलों के परचेज एग्रीमेंट को रद्द कर दिए जाने के बाद मंडल में 195 मेगावाट बिजली एकदम से कम हो गई है। जिसके कारण सोहावल और बस्ती से मिलने वाली बिजली पर ही पूरी तरह से आश्रित होना पड़ रहा है।
इनसेट
...तो इसलिए बढ़ा है बिजली संकट
जम्मू कश्मीर के साथ ही उत्तराखंड में लगे बिजली उत्पादन के हाइड्रोप्लांट पानी आने से बंद हो गए हैं। जिसके कारण सूबे में ढाई से तीन हजार मेगावाट बिजली पहले से ही कम हो गई है। ऊपर से बजाज चीनीमिल के पूरे प्रदेश में संचालित आधा दर्जन से ऊपर पावर प्लांटों के बंद हो जाने से तकरीबन साढ़े 4 सौ मेगावाट बिजली भी कम हो गई है। जिसके कारण न सिर्फ मंडल के चार जिलों बल्कि बाकी जनपदों में भी बिजली का संकट एकदम से काफी गहरा गया है।
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इनसेट
मंडल की इन-इन चीनीमिलों से मिलती थी 195 मेगावाट बिजली
आईपीपी (इंडीपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर)
उतरौला चीनीमिल-90 मेगावाट
कुंदुरखी चीनीमिल-90 मेगावाट
कोजेन (को-जेनरेशन प्लांट)
बलरामपुर चीनीमिल बलरामपुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल इटईमैदा उतरौला-05 मेगावाट
मनकापुर चीनीमिल मनकापुर-05 मेगावाट
बजाज चीनीमिल कुंदुरखी-05 मेगावाट
नोट : बजाज चीनीमिल ने अपने यहां फरवरी महीने में ही बिजली का उत्पादन बगास न होने के कारण बंद कर दिया था।
वर्जन
यह सही है कि मंडल की पांच चीनीमिलों का परचेज एग्रीमेंट पावर कारपोरेशन ने अधिक दाम पर बिजली खरीद को लेकर रद्द कर दिया है। जिससे मंडल में बिजली की कुछ क्राइसेस जरूर हुई है। क्योंकि अभी तक 195 मेगावाट बिजली का जो उत्पादन पांच चीनी मिलों से होता था, उसका ज्यादातर उपयोग मंडल में ही होता था और उन्हें सोहावल व बस्ती की लाइन से बिजली लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन बिजली की क्राइसेस की एक बड़ी वजह जम्मूकश्मीर व उत्तराखंड में बंद हुए हाइड्रो प्लांट भी हैं। जिससे बिजली कम हुई है।
-सीपी पाण्डेय, एक्सईएन, पारेषण खंड
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