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पहले चीनी मिल ने अब बैंक ने किसानों का 10 करोड़ दबाया

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पहले चीनी मिल अब बैंक ने दबाया किसानों का 10 करोड़
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85 फीसदी चीनी कुर्क होने के बाद बजाज चीनी मिल ने किया था भुगतान
स्टाफ की कमी बताकर बैंक ने रोका किसानों का बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। आसमान से गिरा खजूर में अटका... वाली कहावत इस समय किसानों के गन्ना मूल्य को किसानों के खाते में न भेजने से जिले के अग्रणी बैंक इलाहाबाद बैंक पर फिट बैठ रही है। किसानों के गन्ना मूल्य को पहले बजाज चीनी ने रोका और अब इलाहाबाद बैंक ने किसानों का 10 करोड़ रुपये दबा लिया है। बकाया न मिलने से करीब आठ हजार गन्ना किसान परेशान हैं।
इलाहाबाद बैंक किसानों के इस पैसे को किसानों के खाते में भेजवाने के बजाए कई दिनों से अपने पास रोक रखा है। जबकि बजाज कुन्दरखी चीनी मिल क्षेत्र के करीब आठ लाख किसान लम्बे समय से अपने बैंक खाते में पैसा आने के इंतजार में हैं। बताया जाता है कि बैंक ने स्टाफ की कमी का हवाला बताकर किसानों की गाढ़ी कमाई को कुछ दिन के लिए दबा लिया है। जिले की एक मात्र बजाज कुन्दरखी चीनी मिल ने किसानों के गन्ना मूल्य का पैसा फंसा रखा है। जबकि बलरामपुर ग्रुप की अन्य सभी चीनी मिलों की ओर से तय समय में ही किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। बजाज चीनी मिल की चीनी व शीरे आदि को जिला प्रशासन ने कुर्क कर रखा है। चीनी मिल के प्रबंधतन्त्र व जिला प्रशासन के संयुक्त बैंक खाते में बिकने वाली चीनी का 85 प्रतिशत धन किसानों के गन्ना मूल्य बकाए के भुगतान के लिए अधिग्रहित किया गया है। बजाज चीनी मिल की ओर से इस सप्ताह में बकाया गन्ना मूल्य का करीब 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। लेकिन उसे इलाहाबाद बैंक ने किसानों के खाते में नही भेजवाया। बताया जाता है कि किसान चीनी मिल व गन्ना विभाग और अपने खाते वाले बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। वहां से किसानों को बताया गया है कि मिल की ओर से 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। लेकिन किसान हैरान हैं कि पैसा उनके खाते में अभी तक क्यों नही पहुंचा है। किसानों को जानकारी दी गई कि अभी जहां मिल का खाता है उस इलाहाबाद बैंक ने ही किसानों के धन को ट्रांसफर नही किया है।
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इनसेट
गन्ना मूल्य न मिलने से किसानों के ठप पड़े काम
गोंडा। गन्ना किसानों की प्रमुख नगदी फसल है। जो फिलहाल चीनी मिल की मनमानी से यह उधारी की फसल बनी हुई है। किसानों के गन्ना बेचे छह माह से अधिक हो चुके हैं और उन्हें अभी तक गन्ने का मूल्य नही मिल सका है। गन्ना मूल्य न मिलने से किसानों का कई बड़ा काम ठप पड़ गया है। कई किसान अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस अदा नही कर पा रहे हैं तो कई के घरों में शादी टल चुकी है। यही नही तमाम किसानों के रोजमर्रा के खर्च के लिए गन्ने का पैसा ही मात्र एक नगदी आधार है। दूसरी ओर इसी पैसे से किसानों को धान,मक्का,अरहर आदि की फसलों में भी खाद व दवाओं की की खरीद करनी है। ऐसे में गन्ने का पैसा न मिलने से किसान का विकास रुक गया है।
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इनसेट
बजाज चीनी मिल के गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति
* कुल गन्ना खरीद- 73.02 लाख क्विंटल
* कुल देय गन्ना मूल्य- 22182.24 लाख रुपये
* कुल गन्ना मूल्य भुगतान- 18899.76 लाख रुपये
* कुल बकाया गन्ना मूल्य- 3282.48 लाख रुपये

इनसेट
गन्ना किसानों का जो पहले पैसा आया था वह जा चुका है कुछ और पैसा हाल में आया है उसे भेजा जा रहा है। एक-दो दिन में पूरा पैसा ट्रांसफर हो जाएगा। बैंक में कम स्टाफ व काम की अधिकता से कुछ समय लग रहा है। किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाएगा।
- हीरा सिंह, एजीएम इलाहाबाद बैंक
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