शिक्षामित्रों ने किया शिक्षण कार्य का बहिष्कार
अधर मेें 3269 शिक्षामित्रों का भविष्य
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा मित्रों में निराशा
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक पद पर हुए समायोजन को रद करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले के 3269 शिक्षामित्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। फैसले के बाद सकते में आए शिक्षा मित्र बुधवार को स्कूल नहीं गए और शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और राज्य सरकार से इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करने की अपील की।
जिले के 2235 प्राथमिक विद्यालयों में 3269 शिक्षामित्र कार्यरत हैें। दो चरणों में 1950 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन हो चुका है जबकि 1319 शिक्षामित्रों का समायोजन अटका हुआ है। 12 अगस्त 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को अवैध बताते हुए इसे रद कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों ने शीर्ष अदालत में अपील की थी। शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि शीर्ष कोर्ट से फैसला उनके पक्ष में आयेगा मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्र पद से सहायक अध्यापक बनकर स्कूलों में पढ़ाने का शिक्षामित्रों का सपना एक बार फिर से टूट गया। लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार को शीर्ष कोर्ट की दो जजों की पीठ ने शिक्षामित्रों के समायोजन को अवलैध ठहराने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी भी मुहर लगा दी और इस समायोजन को रद कर दिया। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद बुधवार को शिक्षामित्र निराश नजर आए। कुछ शिक्षामित्र तो समायोजन निरस्त होने की खबर से भावुक हो गए और अपने आंसू नही रोक पाए। अधिकांश शिक्षामित्र बुधवार को स्कूल नहीं गए और शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया। फैसले से आहत उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के देवी पाटन मंडल अध्यक्ष रामलाल साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नन्हेलाल को सौंपा और राज्य सरकार से इस फैसले के खिलाफ पुर्नविचार याचिका दाखिल करने की मांग की। संघ के मीडिया प्रभारी अवधेश मणि मिश्रा ने बताया सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है और सभी समायोजित व असमायोजित शिक्षामित्रों ने शिक्षण कार्य के बहिष्कार का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 17 वर्ष तक बेसिक शिक्षा को अपने मेहनत से सींचने वाले शिक्षामित्रों का भविष्य आज अधर में है। उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षामित्रों के भविष्य को देखकर उनके पक्ष में कोई सार्थक निर्णय लिए जाने की अपील की। ज्ञापन देने वालो में जिला महामंत्री शिवमूर्ति पांडेय, उपाध्यख राजेंद्र वर्मा, अभिमन्यु प्रसाद मिश्रा, सत्यव्रत सिंह, जितेंद्र प्रकाश ओझा समेत अन्य मौजूद रहे।
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टीईटी पास हैं 700 समायोजित शिक्षामित्र
वर्तमान समय में जिले में करीब 700 शिक्षामित्र टीईटी क्वालीफाई कर चुके है। इन शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन भी हो चुका है लेकिन शीर्ष कोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद इनके ऊपर दोबारा टीईटी पास करने की तलवार लटक गई है। हालांकि इस संबंध में अभी शिक्षा विभाग के अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे है लेकिन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मीडिया प्रभारी अवधेश मणि मिश्रा ने बताया कि सभी शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हो गया है।
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बैंक खातों के संचालन पर लगाई रोक
गोंडा। शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने के फैसले के बाद बुधवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय ने प्राथमिक विद्यालयों के सभी बैंक खातों के संचालन पर रोक लगा दी है। बीएसए ने बताया कि विद्यालय प्रबंध समिति खाता, एमडीएम खाता व ग्राम शिक्षा निधि के बैंक खातों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। अब इन खातों का संचालन खंड शिक्षा अधिकारी की अनुमति से ही किया जा सकेगा।