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स्वास्थ्य विभाग में बंपर तबादलों पर घिरे सीएमओ

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सीएमओ व एडी स्तर से हुए तबादलों डीजी ने लगाई रोक
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- स्वास्थ्य विभाग में बंपर तबादलों पर घिरे सीएमओ
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग में बीते दो महीनों से चल रहे ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में सीएमओ उमेश यादव बुरी तरह फंस गए हैं। महानिदेशक पद्माकर सिंह ने 14 जून को जारी अपने पत्र में जहां बीते दो महीनों के भीतर सीएमओ व एडी स्तर से किए गए उन सभी तबादलों को निरस्त समझने की बात कही है, जो बिना महानिदेशक/उच्चाधिकारियों की अनुमति के किए गए तो वहीं सीएमओ उमेश यादव का तर्क है कि उन्होंने कोई भी तबादला बिना उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के नहीं किया। महानिदेशक का पत्र उन्हें भी मिला है। जिसका वह जवाब उन्हें भेज रहे हैं।
गौरतलब है कि दो महीने पहले सीएमओ ने अपने स्तर से सभी 16 सीएचसी की 40 बिंदुओं के आधार पर जांच कराई थी। जिसके बाद सीएमओ उमेश यादव ने ट्रांसफर-पोस्टिंग की ऐसी झड़ी लगा दी कि उसकी गूंज स्वास्थ्य महानिदेशालय तक जा पहुंची। सीएमओ ने इधर डेढ़ महीने के भीतर जहां आठ डॉक्टरों की तैनाती में फेरबदल किया तो वहीं 11 फार्मासिस्टों को भी इधर से उधर कर दिया। वह भी बिना किसी शासन से जारी नीति के। जिसे लेकर डीपीए (डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएसन) को सीएमओ के खिलाफ मोर्चा तक खोलना पड़ा। इसके बावजूद सीएमओ ने न तो तबादलों से कोई परहेज की और न ही बिना एक डॉक्टर के रिलीव हुए दूसरे डॉक्टरों को जॉइन कराने में।
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बुधवार को इस बारे में महानिदेशालय स्तर से जारी आदेश के बाद जहां तबादले से प्रभावित डॉक्टरों व फार्मासिस्टों ने राहत की सांस ली है तो वहीं सीएमओ उमेश यादव का कहना है कि, उन्होंने जितने भी तबादले इधर पिछले डेढ़ महीने के भीतर किए हैं, वह पूरी तरह से सही हैं। जिसकी परमीशन उन्होंने डीएचएस (जिला स्वास्थ्य समिति) से ले रखी है। अब रही बात निदेशालय की स्वीकृति की तो दो महीने पहले जिस समय उन्होंने सभी 16 सीएचसी की जांच कराई थी। उसी समय प्रमुख सचिव, महानिदेशक व स्वास्थ्य मंत्री को इस बारे में कार्रवाई के लिए अपनी संस्तुति के साथ पूरी रिपोर्ट उन्होंने भेज दी थी। चूंकि जिस पत्र पर ज्यादा दिनों तक कोई अनुमोदन नहीं मिलता है, उसे अनुमोदन प्राप्त मान लिया जाता है। साथ ही अपने स्तर से एक आला अधिकारी का अनुमोदन भी उन्होंने ले रखा है। इसलिए जो भी तबादले उन्होंने किए हैं, वह पूरी तरह से सही हैं। जिसमें किसी के रिवर्ट होने का कोई सवाल ही नहीं है।
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रिपोर्ट भेजने से पहले ही तय गए थे तबादले
दो महीने पहले जिस समय सीएमओ उमेश यादव ने सभी 16 सीएचसी की जांच कराई थी। डॉक्टर व फार्मासिस्ट उसी समय उनके निशाने पर आ गए थे। शासन व डीएचएस की बैठक में 40 बिंदुओं पर आधारित सीएचसी की रिपोर्ट रखने के बाद सीएमओ ने जो तबादलों का सिलसिला शुरू किया वह अभी तक जारी है। शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में सीएमओ ने न सिर्फ डेढ़ दर्जन से अधिक डॉक्टरों के तबादले की बात कही थी, बल्कि कई डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की सेवा समाप्ति के अलावा आरकेबीएस की पूरी टीम बदलने व कइयों के निलंबन तक की सिफारिश की थी।
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नोटिस दी न मांगा स्पष्टीकरण और सीधे कार्रवाई
सीएमओ ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजने के बाद न तो किसी डॉक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ से कोई स्पष्टीकरण मांगा न ही किसी को नोटिस जारी किया और बंपर तबादले करते चले गए। जिसे लेकर डीपीए (डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन) की उनसे कई बार भिड़ंत भी हुई। लेकिन सीएमओ ने अपना रवैया नहीं बदला।
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सीएमओ के क्रियाकलापों की हो जांच
चीफ फार्मासिस्ट सालिकराम तिवारी का कहना है कि, सीएमओ ने अब तक जितने भी तबादले किए हैं, वह फर्जी और सिर्फ पैसा एेंठने के लिए किए हैं। बिना शासन से जारी नीति के उन्हें तबादला करने का अधिकार नहीं है। जिसे लेकर वह आखिरी दम तक सीएमओ से लड़ते रहेंगे। उन्होंने सीएमओ गोंडा के क्रियाकलापों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
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