पहाड़ों पर हो रही बरसात और बनबसा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। एल्गिन-चरसड़ी ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के लाल निशान को पार कर 11 सेमी ऊपर बह रही है। जबकि अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर लाल निशान छूने को बेताब है।
घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने करनैलगंज के 81 और तरबगंज के 76 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही यहां बाढ़ बचाव के इंतजामों के लिए बनाई गई 11-11 बाढ़ चौकियों पर कुल 620 नावों के साथ ही 14 गोताखोरों की ड्यूटी भी लगा दी है। वहीं, घाघरा व सरयू नदी में आई बाढ़ से ग्रामीणों का पलायन भी तेजी के साथ होने लगा है।
बाढ़ से हर साल प्रभावित होने वाली जिले की दो तहसीलों करनैलगंज व नवाबगंज में इस बार भी बाढ़ का खतरा मंडराना शुरू हो गया है। गुरुवार को घाघरा नदी ने जैसे ही खतरे का लाल निशान पार किया, वैसे ही प्रशासनिक महकमे के साथ ही बाढ़ बचाव के इंतजामों में लगे बाढ़ कार्यखंड विभाग की धड़कनें तेज हो गईं।
सीडीओ जयंत कुमार दीक्षित ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता की। जिसमें बताया गया कि बनबसा बैराज से बुधवार की रात नदी में करीब 1.91 लाख क्यूसेक पानी फिर से छोड़ दिया गया है, जो शुक्रवार की रात या फिर शनिवार की सुबह तक जिले की सीमा में पहुंच सकता है। इसलिए दोनों तहसीलों के बाढ़ प्रभावित सभी 157 गांवों की अलग-अलग 11-11 बाढ़ चौंकियों को अलर्ट करते हुए यहां कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। जिससे आने वाले दिनों में यहां आने वाले बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद मिल सके।
वहीं करनैलगंज के लिए 502 और तरबगंज के लिए 118 नावों की भी व्यवस्था लोगों को नदी में पानी बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए की गई है। दोनों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को बाढ़ खंड विभाग के लोगों के साथ मिलकर बंधे की सुरक्षा और इलाकाई लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि बाढ़ से निपटने के लिए बाढ़ कंट्रोल रूम भी गठित किया गया है।
उनके मुताबिक घाघरा खतरे के निशान 106.07 को पार करके 11 सेमी ऊपर 106.18 पर बह रही है। उधर, घाघरा नदी के खतरे का लाल निशान पार करते ही नवाबगंज के कई गांवों में भी लोगों का पलायन शुरू हो गया है। हालांकि सरयू नदी का जलस्तर अयोध्या में अभी भी खतरे के निशान से 45 सेमी नीचे है।