सत्र शुरू होते ही चार लाख बच्चों को मिलेंगी किताबें
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में जुलाई से चार लाख नौनिहालों को किताबें मिल जाएंगी। इसके लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के बच्चों को किताबें समय से मिल सकें, इसके लिए सत्यापन के साथ ही 16 बीआरसी पर किताबें भेजने का कार्य हो रहा है।
जुलाई में करीब 21 लाख किताबें पहुंचाने के लिए कई वाहनों को लगाया गया है। हर बीआरसी पर गोदाम भी बनाया गया है। बीते सत्र में बच्चों को किताबें समय से नहीं मिली थीं।
मगर इस बार चार लाख बच्चों को सत्र शुरू होते ही किताबें देने की तैयारी है। बीएसए मनिराम सिंह ने किताबें समय से पहुंचाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को सत्यापन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने न्याय पंचायत स्तर पर व्यवस्था कराने को कहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बच्चों को समय से किताबें उपलब्ध नहीं होने से हर साल पढ़ाई प्रभावित रहती थी। बीते शैक्षिक सत्र में तो तीन महीने तक पुरानी किताबों से पढ़ाई हुई और किताबें काफी देर तक आ सकीं।
ऐसे में इस बार शासन ने समय से किताबों की आपूर्ति कराने की कार्रवाई पहले ही पूरी कर ली थी। मार्च से ही किताबों की आपूर्ति जिले में शुुरू हो गई थी।
तीन हजार से अधिक स्कूलों के चार लाख के करीब बच्चों को कक्षा एक से आठ तक की किताबें जुलाई के पहले हफ्ते तक देने के लिए विभागीय अधिकारी जुटे हैं। सीडीओ आशीष कुमार की देखरेख में किताबों का सत्यापन हो रहा है।
गुरुवार को कम्पोजिट स्कूल में रखी गईं किताबों का सत्यापन किया गया। इन्हें ब्लॉक वार तय करके वितरण की कार्रवाई भी हो रही है। बीआरसी पर किताबें रखी जाएंगी और वहां से न्याय पंचायत के जरिए स्कूलों तक भेजी जाएगी।
बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों के बच्चों को समय से किताबें देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 90 फीसदी किताबें आ गई हैं, जुलाई में किताबों का वितरण करा दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा आठ के छात्र-छात्राएं अब अपराजिता की पढ़ाई करेंगे। कक्षा-8 की मंजरी किताब के पाठ पांच में अपराजिता का पाठ शामिल किया गया है।
जिला समन्वयक विनोद जायसवाल ने बताया कि छात्राओं में हौसला व हिम्मत बढ़ाने के लिए ये पाठ सहायक साबित होगा। अमर उजाला की अपराजिता मुहिम से छात्रों में उत्साह है और जानकारी हासिल करने की इच्छा भी बढ़ी है। अब विभाग ने अपराजिता को पाठ में शामिल करके एक बड़ा संदेश दिया है।
समेकित शिक्षा के समन्वयक राजेश सिंह ने कहा कि अपराजिता पाठ से दिव्यांग बच्चों का भी हौसला बढ़ेगा। आइडियल शिक्षक राखाराम गुप्त ने कहा कि अपराजिता को पाठ्यक्रम में शामिल करके अच्छी पहल की गई है। इस मौके पर एमडीएम समन्वयक गणेश गुप्ता भी मौजूद रहे।