गोंडा। देश की सबसे बड़ी पंचायत के सत्ता संग्राम में वोटों को साधने में भाजपा का दांव सफल साबित हुआ। भाजपा प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैय्या के सामने गठबंधन से सपा ने पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को उतारा। भाजपा को मुश्किल में डालने के लिए कांग्रेस ने बड़ा दांव चला और अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल को उतार दिया। गोंडा सदर के साथ ही मेहनौन, गौरा, उतरौला और मनकापुर में बड़ी संख्या में कुर्मी वोटरों को भाजपा से सरकाने की कोशिश भी कांग्रेस ने किया। यहां तक ही युवा नेता हार्दिक पटेल तक की सभा भी कराकर बड़े संकेत दिए। लेकिन भाजपा की रणनीति ने कांग्रेस की रणनीति को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की, वहीं सपा प्रत्याशी की रफ्तार पर भी अंकुश लगा दी। भाजपा की रणनीति में गौरा क्षेत्र के विधायक प्रभात वर्मा का कद बढ़ गया है।
कांग्रेस के दांव को उलटने के लिए विधायक प्रभात वर्मा ने कई सभाएं की और सजातीय वोटों को साधने के लिए कांग्रेस की चाल को भी उजागर किया। पूरे चुनाव में उनकी सक्रियता का परिणाम पर असर भी दिखा। कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पटेल 25 हजार 686 मत ही हासिल कर पाईं। वह भी तब जब कुर्मी वोटर करीब दो लाख से अधिक हैं और वर्ष 2009 से कांग्रेस से ही बेनी प्रसाद वर्मा चुनाव भी जीत चुके हैं। लेकिन इस बार मोदी लहर के आगे सबके दांव उल्टे पड़ गए। कांग्रेस के वोटों से ही गठबंधन के प्रत्याशी का भविष्य भी टिका माना जा रहा था। लेकिन परिणाम ने सभी को झटके दिए। फिलहाल मोदी लहर होने के बाद भी भाजपा के रणनीतिकारों ने कसी रणनीति तैयार कर रखी थी।
गौरा विधायक प्रभात वर्मा को आगे करने के साथ ही उतरौला के विधायक राम प्रताप वर्मा भी लगातर जुटे रहे। फिलहाल कुशल वक्ता और विकास कार्यों में सबसे आगे विधायक गौरा प्रभात वर्मा ने अपना स्थान आम लोगों में सटीक बनाया। स्थिति यह रही कि उनके दांव की दाद मिल रही है। भाजपा प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैय्या ने न सिर्फ सबको पीछे धकेल दिया, बल्कि अप्रत्याशित 5 लाख 8 हजार 190 मत हालिस करके पड़े मतों के 55 फीसदी से अधिक मतदाताओं का विश्वास हासिल किया। जबकि गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व मंत्री पंडित सिंह को 37 फीसदी मत हासिल हुए, मोदी लहर के बाद भी उन्होंने 3 लाख 41 हजार 830 मत हासिल करने में सफल रहे। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले सपा को 1.42 लाख अधिक मत हासिल हुए हैं। फिर भी करारी हार का सामना करना पड़ा। माना जा रहा है कि गोंडा में भाजपा की सियासी रणनीति कारगर सिद्व हुई। कारण सियासी बिसात मुश्किल भरी बिछी थी।
संगठन की साख भी बढ़ी और प्रभारियों का कद बढ़ा
गोंडा में भाजपा की जीत से संगठन की साख एक बार फिर बढ़ गई है। जिलाध्यक्ष पीयूष मिश्रा के नेतृत्व मेें वर्ष 2014 में भाजपा ने दोनों संसदीय सीटों पर जीत हासिल की और फिर विस चुनाव में सातों सीटों पर जीत मिली। एक बार फिर दोनों सीटों पर शानदार जीत ने जिलाध्यक्ष के साथ ही संगठन की साख को बढ़ा दिया है। इसके अलावा सभी विधानसभा क्षेत्रों में सफलता से विधायकों के चेहरे भी चमक उठे हैं। भाजपा से रूठकर गए महेश नरायण तिवारी व निर्मल श्रीवास्तव की वापसी से भी भगवा रंग गाढ़ा हुआ। इसके अलावा बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल का कद भी बढ़ा। वह गोंडा व कैसरगंज की प्रभारी थीं और दोनो सीटों के साथ ही उनके घर बहराइच की सीट भी भाजपा ने जीत ली। भाजपा की जीत से सत्ता संग्राम में माहौल बनाने में जुटे नेताओं का ग्राफ भी बढ़ा है।