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राजधानी को जोडने वाले फोरलेन से 3 साल खेलते रहे जिम्मेदार

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तीन साल में नहीं पूरा हो पाया लखनऊ को जोड़ने वाला फोरलेन
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गोंडा। राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाले गोंडा-जरवल मार्ग को फोरलेन में बदलने का काम तीन सालों में भी पूरा नही हो सका। लोकसभा चुनाव में यह मार्ग अहम मुद्दा के रूप में गूंज रहा है।

अभी भी बालपुर से करनैलगंज तक लोग जाने की हिम्मत नही जुटा पा रहे हैं। स्थिति यह है कि फोरलेन का निर्माण पूरा न होने से गोंडा से लखनऊ जाने वालों और विभिन्न क्षेत्रों से गोंडा आने वालों को रास्ता बदल कर आना पड़ता है।
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लखनऊ से बहराइच होते हुए रुपईडीहा फोरलेन का निर्माण शुरू होने के साथ ही जरवलरोड से गोंडा तक और गोंडा से बलरामपुर तक फोरलेन के निर्माण की मांग वर्ष 2014 में ही जोर पकड़ने लगी। 2015 में जरवल रोड से गोंडा तक करीब 56 किमी लम्बी रोड के लिए 545 करोड़ का बजट स्वीकृत हो गया।

सड़क निर्माण के लिए पेड़ों को हटाने के साथ ही सड़कों के किनारे अतिक्रमण हटाना एक चुनौती बनी रही। दो सालों तक पेड़ों को हटाने और सड़कों पर पुल व पुलिया के निर्माण की कवायद होती रही।

इसके साथ ही सत्ता परिवर्तन होते ही काम ठप्प हो गया। जैसे-तैसे शहर में सीसीरोड़ का निर्माण शुरू हो पाया तो चंद दिनों बाद फिर कार्य रुक गया। शहर में सीसी रोड़ बड़गांव चौराहे से पथवलिया तक तो बन गई लेकिन बड़गांव से जयनरायन चौराहे तक फोरलेन की रोड़ नही बन सकी है।

बड़गांव से जय नरायन चौराहे तक का निर्माण तो अतिक्रमण न हटने से फंसा हुआ है और जिम्मेदार इसके लिए गंभीर नही हैं। इसके अलावा पथवलिया से बालपुर होते हुए करनैलगंज तक का निर्माण धीमी गति से चल रहा है।

बालपुर के श्याम कहते हैं कि पूरे मार्ग पर धूल ही धूल है और निर्माण न होने से राह आसान नही हो रही है। हादसे का डऱ्र हमेशा बना रहता है। सड़क के निर्माण में दो साल तक की लापरवाही अब ऐन चुनाव के वक्त भारी पड़ती दिख रही है।

निर्माण देर से शुरू होने के बाद भी जैसे-तैसे जरवलरोड से भंभुवा के करीब तक रोड बन गई है। जरवलरोड में तो सीसीरोड बनी है लेकिन भंभुवा कस्बे में सीसीरोड का निर्माण न होना चौंकाने वाला है।

बताया जा रहा है कि सियासत के चक्कर में यहां की फोरलेन सीसी बननी थी लेकिन उसके स्थान पर लेपन मार्ग का ही निर्माण कराया गया है। इससे सड़क के टिकाऊपन पर सवाल खड़ा है। इसी तरह चौरी के पास की रोड भी सीसी नही बनाई गई है। सड़क के साथ तीन सालों से जिम्मेदारों का खेल अब सभी को चुभ रहा है।

फोरलेन के रास्ते में सरयू पुल और दो ओबर ब्रिज बनाने की कार्रवाई पर चुप्पी है। इससे राह आसान होती नही दिख रही है। सरयू पुराना बना है और सिंगल रोड के हिसाब से पुल का निर्माण हुआ था।
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इसे फोरलेन के स्तर का बनाने की चिंता की किसी को नही है। इसी तरह सरयू क्रासिंग और जहांगिरवा क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाए बिना फोरलेन पूरा करने के बाद रास्ते पर चलना चुनौती ही होगी। फिलहाल जिम्मेदार इसके लिए गंभीर नही दिख रहे हैं।
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