फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफसरों, माफियों व ठेकेदार के सिंडिकेट बना डोरस्टेप डिलेवरी में रोड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
अफसरों व ठेकेदार का सिंडिकेट बना डोर स्टेप डिलेवरी में रोड़ा
विज्ञापन

पांच साल पहले अनाज के डायवर्जन को रोकने के लिए शासन ने शुरू की थी योजना
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिले में अफसरों, अनाज माफिया व ठेकेदारों के सिंडिकेट के कारण डोर स्टेप डिलेवरी योजना फाइलों में कैद हो गई। करीब पांच साल पहले शासन की ओर से सरकारी अनाज के डायवर्जन व कालाबाजारी होने से रोकने के लिए डोर स्टेप डिलेवरी योजना शुरू की थी। लेकिन जिले में जिम्मेदार विभाग के लोगों को राशन माफिया के गठजोड़ से परवान नही चढ़ी। जिले में वर्ष 2004 व 2006 के बीच करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। जिसमें कई फाइनेंसर, ट्रांसपोर्टर,अधिकारी व कर्मचारी जेल जा चुके हैं। जिले में इस योजना के लिए सिर्फ कवायद शुरू हुई थी। शासन को योजना शुरू कर दिये जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से बिना कुछ ठोस व्यवस्था किये सिर्फ एक वाहन पर बैनर लगाकर योजना के तहत वाहन रवाना किये जाने की खानापूर्ति कर दी गई थी। तब से इसकी खोज खबर न तो शासन ने की न ही जिले के अधिकारियों ने इस इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई कार्य किया।
इनसेट
डीएम ने उस वक्त की थी योजना की शुरूआत
जिले के पूर्व जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह ने जिले में उचित दर विक्रेताओं के यहां तक सुरक्षित अनाज पहुंचाने के लिए शासन की ओर से शुरू की डोर स्टेप डिलेवरी योजना के तहत शुरूआत की थी। उन्होंने सरकार अनाज को एक ट्रक पर योजना का नाम ब्लाक गोदाम व दुकान लिखा बैनर लगे ट्रक को हरी झंडी देकर रवाना किया था। लेकिन उसी एक ट्रक के बाद न तो कोई ट्रक भेजी गई न ही इसके लिए कारगर उपाय हुए। मजे की बात यह रही इस योजना की किसी भी अफसर ने खोज खबर कर कभी समीक्षा भी नही की।
विज्ञापन

इनसेट
इन विभागों की लापरवाही से दब गई योजना
अनाज के डायवर्जन को रोकने के लिए शासन की ओर से शुरू की गई डोर स्टेप डिलेवरी योजना की कवायद विभागों की लापरवाही में दब गई। पूत विभाग की ओर से राशन कार्डो के डिजिटाईजेशन में खूब लापरवाही की गई। इसी दौरान शासन की ओर से भी कभी कार्डो को बैंक खातों तो कभी वोटर आईडी तो कभी आधार से लिंक कि ये जाने के आदेश आते गये। यही नही जब आधार फीडिंग पर जोर बढ़ा तो राशन कार्ड की फीडिंग करने वाले जिम्मेदारों ने बोगस राशन कार्ड की फीडिंग करा दी। इससे एक तो विभाग के अधिकारी समीक्षा में डांट खाने से बच गये दूसरे यह काम और लटक गया । इसके अलावा दूसरा जिम्मेदार उस दौर में आवश्यक वस्तु निगम रहा है। इस विभाग पर पूरी तरह से राशन माफिया का सिंडिकेट हाबी रहा। यही वजह रही कि इसके कई गोदाम प्रभारी कई बार गोदाम छोड़ छोड़ कर भागने पर मजबूर हुए। कई की पिटाई भी की गई। इस विभाग ने गोदाम से माल ढुलाई के लिए ठेकेदारों का चयन करने में कोई दिलचस्पी नही ली। यही नही इन विभागों कें जिम्मेदार अफसरों के साथ जिला प्रशासन ने भी इसकी तैयारी को लेकर न तो कोई काम किया न ही दिक्कतों पर शासन से कोई गाइड लाइन मांगी। योजना के कवायद व इससे जुड़ी फाइलों को अपने अपने पास दबाए रखा।
विज्ञापन

इनसेट
करीब पांच साल पहले शासन ने अनाज में गड़बड़ी रोकने के लिए डोर स्टेप डिलेवरी योजना शुरू की थी। शासन की मंशा के मुताबिक राशन कार्डों का डिजिटाईजेशन करने के साथ ब्लाकवार गोदामों से अनाज सीधे उचित दर विक्रेताओं के यहां पहुंचाया जाना था। उस वक्त वह काम तत्काल नही हो सका और बात पड़ी रह गई लेकिन अब उसे पूरा किया जाना है।
- पूरन सिंह चौहान, डीएसओ गोंडा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें