मारा-मारी से बचने के लिए ग्राहकों ने पैसे जमा करने के लिए डाकघरों की ली शरण
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जिले में हेड ऑफिस सहित 20 डाकघरों में 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद से अब तक 15.34 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराए गए। जिले में नोटबंदी के बाद सभी डाकघरों में कुल 49 नए अकाउंट खोले गए। आठ नवंबर से पहले जिले के सभी डाकघरों में 13 लाख से ज्यादा ग्राहकों के अकाउंट चल रहे थे। मारा-मारी से बचने के लिए ग्राहकों ने पुराने 500 व 1000 रुपये के नोट जमा कराने के लिए डाकघरों की शरण ली।
इंचार्ज पोस्टमास्टर ओंकार प्रसाद श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि प्रधानमंत्री के 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के फैसले के बाद से हेड ऑफिस सहित बलरामपुर व गोंडा जनपद में संचालित 20 डाकघरों में 15 करोड़ 33 लाख 58 हजार रुपये जमा कराए गए।
500 व 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने के साथ-साथ अकाउंट में भी सीधे जमा कराए गए हैं। नवंबर में जिले के सभी डाकघरों में कुल मिलाकर 49 नए अकाउंट भी खोले गए हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी डाकघरों में आठ नवंबर से पहले करीब 13 लाख ग्राहकों के खाते संचालित थे।
प्रधानमंत्री के आदेश के बाद दो-तीन दिनों तक पैसे जमा करने व बदलने वालों की डाकघरों में भीड़ उमड़ी लेकिन धीरे-धीरे सामान्य हो गई। सभी डाकघरों में ग्राहकों के पैसे जमा कराए गए और पुराने नोट भी बदले गए। उन्होंने बताया कि डाकघरों में कर्मियों की कमी के कारण थोड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। डाकघरों में रुपये बदलने वाले ग्राहकों की सेवा के लिए देर रात तक भी काउंटर चलाए गए।
पोस्टऑफिस में 500 व 1000 रुपये के नोट जमा कराने वाले ग्राहक आशीष कुमार, देवेंद्र, दिनेश, राघवराम, निरुपम, रजनीश, रमेश व महेंद्र कुमार आदि ने बताया कि बैंकों की अपेक्षा डाकघरों में थोड़ी राहत थी। भीड़ कम होने से पुराने नोट जमा करने व बदलने में लोगों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। जिले के सभी डाकघरों में आसानी के साथ 500 व 1000 रुपये के नोट जमा कराए गए।