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बेलवा नोहर के बाद अब नरायनपुर मर्दन गांव मे मातम

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बरेली हादसे में नरायनपुर मर्दन गांव के भी 5 लोगों की मौत
पीड़ित परिवार ने रोडवेज एआरएम को दिया पत्र, दिल्ली से बेटा भी पहुंचा बरेली
बरेली हादसे में गोंडा क मरने वालों की संख्या 11 हुई
अमर उजाला ब्यूरो
बालपुर/गोंडा। बरेली बस हादसे में सोमवार को जहां बेलवा नोहर गांव के दो परिवारों 6 लोगों के मरने का पता चला था तो वहीं मंगलवार को नरायनपुर मर्दन गांव के मजरे शिवप्रसाद पुरवा से भी 5 लोगों के इस हादसे में मारे जाने की पुष्टि उनके परिवारीजनों ने की है। जिसे लेकर एक प्रार्थनापत्र पीड़ित परिवार की ओर से रोडवेज एआरएम को दिया गया है।
रविवार आधी रात बरेली में शाहजहांपुर मोड़ के पास हादसे का शिकार हुई गोंडा डिपो की बस से नरायनपुर मर्दन आ रहे एक ही परिवार के पांच और लोगों की भी जलकर मौत हुई है। इस गांव में रहने वाले जगवीर सिंह दिल्ली में रहकर फल वाली पेटी बनाते हैं। 5 जून को जगवीर को अपनी रिश्तेदारी की किसी शादी में शामिल होना था। जिसके लिए 3 जून को उनके बेटे शेर सिंह ने उन्हें गोंडा आने वाली बस पर दिल्ली से बैठा दिया। जगवीर सिंह के साले बलवंत सिंह की ओर से रोडवेज के एआरएम वीरेन्द्र कुमार वर्मा को दिए गए प्रार्थना पत्र के मुताबिक बस संख्या यूपी 43 टी-5978 पर बैठकर दिल्ली से उनके जीजा जगवीर सिंह, बहन शिवकुमारी, जगवीर सिंह की पुत्रवधू सरिता के अलावा सरिता के दो बच्चे रणवीर सिंह (3) व सात महीने की गुंजन अपने गोंडा के नरायनपुर मर्दन अपने पैतृक गांव आ रहे थे। लेकिन हादसे में सभी की जलकर मौत हो गई। रोडवेज के एआरएम वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने पत्र मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बलवंत सिंह के प्रार्थनापत्र को उन्होंने आरएम बरेली को भेज दिया है।
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मरने वालों में अब तक 11 लोग गोंडा के
बरेली बस हादसे में जहां कल तक बेलवा नोहर गांव के 6 लोगों के मरने की सूचना थी तो वहीं अब इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 पहुंच गई है। खास बात यह है कि मरने वाले 11 लोग केवल तीन परिवार के ही हैं। वहीं रोडवेज प्रबंधन ने जिन 15 घायल लोगों की सूची सोमवार को जारी की थी उसमें भी अकेले गोंडा से 7 लोग शामिल थे।
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इनसेट
हादसे की जानकारी मिलते ही बरेली पहुंचा बेटा
बस हादसे की खबर मिलते ही जगवीर सिंह का बेटा शेर सिंह सोमवार को बरेली पहुंचा। चूंकि दिल्ली से उसी ने जगवीर सिंह के साथ अपनी मां, पत्नी व दोनों बच्चों को बैठाया था। इसलिए वह आनन-फानन में भागकर बरेली आया। जहां से फोन पर सारी बात अपने मामा बलवंत सिंह को बताई। जिसके बाद बलवंत सिंह ने इस सम्बंध में एक प्रार्थनापत्र एआरएम को दिया। वहीं सोमवार को पूरे दिन जगवीर सिंह के गांव मर्दनपुर तक में लोगो को इसका पता इसलिए नहीं चल पाया, क्योंकि वहां के लोगों को इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी। मंगलवार की सुबह जैसे ही नरायनपुर में लोगों के उसी बस से जगवीर के गोंडा आने का पता चला जो बरेली में हादसे का शिकार हो गई, तो हर किसी की आंखे नम हो आईं और परिवार के लोगों में रेना मच गया।
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इनसेट
बेलवा नोहर में झांकने तक नहीं गए अधिकारी
बरेली बस हादसे में मारे गए बेलवा नोहर गांव के दो परिवारों के 6 सदस्यों के बावजूद मंगलवार को इस गांव में प्रशासन का कोई भी व्यक्ति गांव नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं जो जनप्रतिनिधि कल तक लोगों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने का दम भरा करते थे। उनकी भी आवाजाही इस गांव में नहीं दिखाई पड़ी। जबकि दूसरी ओर रोडवेज प्रबंधन के अधिकारी भी पीड़ित परिवार को किसी तरह की ढांढस बंधाने के बजाए मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय तक ही सीमित रहे।
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