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दो साल में कार्ययोजना नही बना सकीं 905 गांव की सरकारें

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दो साल में कार्ययोजना तक नहीं बना सकीं 905 ग्राम पंचायतें
भारत सरकार के बजट केंद्रीकरण व डिजटाइजेशन की मंशा पर फिर रहा पानी
1054 में से सिर्फ 149 ग्राम पंचायतों ने फीडिंग़ को भेजी कार्ययोजना
इस्लाम खां
गोंडा। अफसरों की मनमानी से दो साल में जिले की 905 ग्राम पंचायतों की सरकारें कार्ययोजना तक नहीं बना सकीं। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए जारी होने वाले भारत सरकार के बजट केंद्रीकरण पर पानी फिर रहा है। डेढ़ साल पहले जिले के सभी खंड विकास अधिकारियों के साथ सहायक विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायत डेवलेपमेंट प्लान तैयार कराने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। अभी तक 1054 ग्राम पंचायतों में से कुल 149 ग्राम पंचायतों ने ही अपनी कार्ययोजना फीडिंग़ के लिए भेजी है। लापरवाही से न सिर्फ आमजन की सहभागिता से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य होने के फार्मूले को झटका लगा है, बल्कि समय गुजर गया और विकास कार्य भी नहीं हो सका।
दो साल पहले ग्राम पंचायतों के गठन के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव के अलावा प्रमुख सचिव पंचायती राज की ओर से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य गांव के लोगों की मंशानुरूप प्राथमिकता के आधार पर तय सरकार के प्लान प्लस साफ्टवेयर पर अपलोड करने के निर्देश दिये गये थे। इसके लिए अधिकारियों की मानीटरिंग में ग्राम पंचायतों में गठित ग्राम सरकारों की ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में खुली बैठक आयोजित किया जाना था। जिसमें आमजन के सहभागिता से प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों की एक कार्ययोजना तैयार की जानी थी। इसमें ग्राम पंचायतों के सहायक विकास अधिकारियों व खण्ड विकास अधिकारियों की ओर से तय कार्ययोजना का क्रियान्वयन कराया जाना था। लेकिन सरकार के इस प्लान पर खण्ड विकास अधिकारियों व पंचायत अधिकारियों के लापरवाही से पानी फिर गया। इस कार्ययोजना के बाबत ग्राम पंचायतों में अब तक दो बार खुली बैठक आयोजित की जा चुकी है। लेकिन 149 ग्राम पंचायतों को छोड कर किसी गांव की कार्ययोजना नही बन सकी। 905 ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना लटकी पड़ी है। ग्राम पंचायतों की तैयार कार्ययोजना को जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में भारत सरकार की वेबसाइट प्लान प्लस पर अपलोड कराया जाना है। अब तक जिन ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना नही बनी है उन्हें पंचायत राज विभाग ने पत्र जारी कर कार्ययोजना को निर्धारित प्रारूप पर विभाग में देकर प्लान प्लस साइट पर अपलोड कराने का निर्देश दिया है।
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इनसेट
कार्ययोजना बनाने का मकसद
* ग्राम पंचायतों का समेकित विकास आथक व सामाजिक विकास।
* खुली बैठक कर जन समुदाय की सहभागिता व निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाना ।
* ग्राम पंचायतों में आवश्यकताओं का चिह्नीकरण एवं प्राथमिकीकरण।
* विकास योजनाओं में निर्धनों की आजीविका एंव सामाजिक सुरक्षा और कल्याणक को प्राथमिकता।
इनसेट
कार्ययोजना में इन कार्यों शामिल होगा प्लान
* ग्राम पेयजल परिचालन एंव रखरखाव
* गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रम ।
* बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में मध्यान भोजन ।
* ग्रामीण किसान बाजार एंव हाटों का परिचालन ।
* ग्रामीण स्वच्छता के काम ।
* पशु चिकित्सालयों का पर्यवेक्षण रखरखाव ।
* खाद्यान्न वितरण का पर्यवेक्षण कार्य।
* परिसम्पत्तियों का रखरखाव/ग्रामीण पुस्कालय ।
* युवा कल्याण कार्यक्रम व ग्रामीण आवास योजना के लाभाथयों का चयन।
* ऊसर भूमि सुधार कार्यक्रम एंव लघु सिंचाई लाभाथयों का चयन।
इनसेट
कहां कितने ग्राम पंचायतों की बनी जीपीडीपी
बभनजोत - 14
बेलसर - 02
छपिया - 05
हलधरमऊ- 01
कटरा बाजार - 01
झंझरी - 11
मनकापुर - 01
मुजेहना - 04
नवाबगंज - 05
पण्डरीकृपाल - 08
परसपुर - 03
रूपईडीह - 60
तरबगंज - 19
वजीरगंज - 15
कुल - 149
वर्जन
अभी तक मात्र 149 ग्राम पंचायतों का जीपीडीपी बन सका है। सरकार की मंशा है कि खुली बैठक में निचले स्तर से प्राथमिकता वाले काम तय कर उसकी कार्ययोजना बना ली जाए । जिसे बाद में प्लान प्लस पर अपलोड किया जाएगा। पंचायतों के साथ ब्लाक स्तर के अधिकारियों की लापरवाही से कार्य पिछड़ रहा है। कई बार निर्देश जारी किये गये हैं।
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- ऋषिकेश मिश्रा, डीपीएम पंचायत
वर्जन
सभी खण्ड विकास अधिकारियों व सहायक विकास अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया जा चुका है। खुली बैठक कर ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता वाले कार्यों को तय कराएं। ताकि लोगों को भी पता चले कि उनके ग्राम पंचायत में क्या काम हो रहा है। इसके बाद निर्धारित प्रारूप पर कार्ययोजना विभाग को उपलब्ध कराएं।
- घनश्याम सागर, डीपीआरओ
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