चार गांवों की 900 बीघे जमीन घाघरा में समाई
गोंडा। घाघरा नदी अपना दायरा लगातार बढ़ाती जा रही है। पिछले तीन दिनों से नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर नीचे एक ही स्थान पर स्थिर है।
लहरें एल्गिन चरसड़ी बांध में टकराने के साथ ही नदी और बांध के बीच कृषि योग्य भूमि पर तेजी से कटान कर रही है। तीन दिनों में चार गांवों की नौ सौ बीघे से जमीन घाघरा नदी में समाहित हो चुकी है।
कटान से लगातार दायरा बढ़ा रही घाघरा की धारा अब करनैलगंज तहसील के गांव नकहरा व काशीपुर की तरफ रुख करती जा रही है। हालांकि एल्गिन चरसड़ी बांध और अस्थाई रूप से बनाए गए पौने दो किलोमीटर का बांध अभी सुरक्षित है।
मौजूदा समय में कोई खतरा नहीं है। मगर रैंनकट्स के चलते बांध बेहद कमजोर हो चुका है। इससे बांध को खतरा हो सकता है। घाघरा नदी पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.796 टिकी हुई है।
सोमवार को घाघरा में पानी का डिस्चार्ज करीब सवा लाख क्यूसेक था। दूसरी ओर घाघरा ग्राम बेहटा, चरपुरवा, नकहरा व काशीपुर तथा जिले की सीमा पर बसे गांव परसावल, नैपुरा में तेजी से कटान करके करीब 9 सौ बीघे जमीन तीन दिनों में निगल चुकी है।
इसके पहले भी करीब 12 सौ बीघे खेत नदी में समा चुके हैं। चरपुरवा के पास खेतों में लगी गन्ना, परवल के साथ धान की फसल खेत समेत नदी में समाहित हो चुकी है। ग्राम नकहरा व काशीपुर के पास नदी और बांध के बीच की सैकड़ों बीघे जमीन पहले ही समा चुकी है।
चर पुरवा के पास कटान इतनी तेज है गांव का आधा हिस्सा नदी के दायरे में आ चुका है। ग्रामीण लगातार पलायन कर रहे हैं। एल्गिन चरसड़ी बांध पर मौजूद नदी व बांध की निगरानी कर रहे सिंचाई विभाग के अधिकारी बांध को किसी भी स्थिति में बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
हालांकि अभी बांध निर्माण का काम आधा अधूरा है और करीब आधा दर्जन स्थानों पर नदी बांध से टकराकर बांध को मात देने में लगी है।
बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह ने बताया कि नदी कटान कर रही है मगर बांध को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। जहां-जहां रैंनकट्स हैं उन्हें भराने तथा जहां नदी बांध से टकरा रही है उसको मजबूत बनाने का काम कराया जा रहा है।