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किसानों के लिए मुसीबत बनीं खाद की 1343 दुकानें

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गोंडा में खाद की दुकानों की जांच करते अधिकारी। फाइल फोटो। - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिले के पांच लाख किसानों को उर्वरक होने के बाद भी समय से खाद नहीं मिल पाती है। फसलों को जरूरत पड़ने पर उवर्रक की उपलब्धता न होने पर प्रशासन को घेराबंदी का सामना भी करना पड़ता है। इसके पीछे का असल खेल दुकानों के कागजों में ही संचालित होने का है।
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विभाग की पड़ताल में यह मामला सामने आया है कि जिले में 2280 उर्वरक विक्रेताओं की दुकानें पंजीकृत हैं। जिन्हें विभाग ने लाइसेंस दे रखा है। इन विक्रेताओं को किसानों को खाद, बीज की उपलब्धता के लिए लाइसेंस मिला है। इसके बाद भी 1343 दुकानदार ऐसे हैं जो उर्वरक का उठान तो करते हैं लेकिन वितरण नहीं करते। इनके उर्वरक वितरण में खेल हो रहा है।
किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर उर्वरक के विक्रेताओं को लाइसेंस दिए गए हैं। विभाग की रिपोर्ट पर ही गौर करें तो 2280 उर्वरक विक्रेताओं में 937 विक्रेता ही सक्रिय हैं और उठान वितरण करते हैं। इसके साथ ही वितरण के लिए ई-पॉश मशीन तो 1653 ने ले ली है, लेकिन इसमें भी 617 ऐसे हैं जो विभाग के नियमों से वितरण का कार्य नहीं करते हैं। लेकिन 937 विक्रेताओं को छोड़ दिया जाए तो 1343 दुकानदारों की दुकानें सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रही हैं।
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इनके लाइसेंस के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। किसान शिवाकांत शुक्ल कहते हैं कि कई विक्रेता ऐसे हैं जो किसानों को उर्वरक नहीं देते हैं। इसके अलावा हाल में ही में विभाग ने जांच किया तो एक दर्जन से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई भी की है। लेकिन दुकान का संचालन न करने वाले दुकानदार हर बार विभागीय जुगत से बच जाते हैं। इनकी दुकान ही खोजे अधिकारी नहीं पाते हैं। अब इस मामले की छानबीन विभाग ने शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इनके लाइसेंस पर हो रहे दुरुपयोग का पता विभाग के कुछ लोगों को है और सांठगांठ से यह खेल सालों से चला आ रहा है।
उर्वरक विक्रेताओं पर शिकंजा कसने के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था
अब कागजों में दुकान चलाने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। हर दुकानदार को अब क्यूआर कोड जारी होगा। इसके लिए दुकानदारों को 30 सितंबर तक क्यूआर कोड जारी कराने की मोहलत दी गई है। इस कोड के आधार पर ही दुकानदारों की स्थिति का पता हो सकेगा। हर दुकानदार को अब पक्की रसीद ही देनी होगी। अभी कैश मेमो से काम चल रहा है, क्यूआर कोड की रसीद जारी होने से यह स्पष्ट रहेगा कि किसान को खाद किस दुकान से कब मिली है। कोई कमी आने पर सीधे संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई हो सकेगी। यही नहीं किस दुकानदार ने कितनी खाद लिए और कितने का वितरण किया, वह अब कागजी नहीं रहेगा। आनलाइन ही उसी क्यूआर कोड से स्थिति साफ हो जाएगी।
उर्वरक विक्रेताओं की दुकानों पर हुई बड़े पैमाने पर कार्रवाई
सितंबर में ही उर्वरक विक्रेताओं की बड़े पैमाने पर जांच हुई और विभाग ने कार्रवाई भी की है। जिलाधिकारी के आदेश पर वितरण में गड़बड़ी करने वाले 35 दुकानदारों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। वहीं साधन सहकारी समिति के चार सचिवों पर भी कार्रवाई की गई है। 577 दुकानों की जांच हो चुकी है और 17 दुकानें के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। इसके बाद भी दुकानदारों में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। जो वितरण नहीं करते थे, वह आज भी सिर्फ लाइसेंस का प्रयोग करते हैं। दुकान खोलने के बजाए, कृषि विभाग का चक्कर काटते रहते हैं।
किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए विभाग सतर्क है। लगातार दुकानों की जांच की जा रही है और कार्रवाई भी की जाती है। दुकान न खोलने की शिकायत जहां से भी आती कार्रवाई की जाती है।
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- जेपी यादव, जिला कृषि अधिकारी
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