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उखड़ी सडक़ों पर लहूलुहान होने को तैयार आस्था

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उखड़ी सड़कों पर लहूलुहान होने को तैयार आस्था
5 साल से श्रद्धालुओं की राह में काटों की तरह गड़ रही सडक़ें
अमर उजाला ब्यूरो
रुपईडीह (गोंडा)। 23 अगस्त से लाखों की संख्या में शिवभक्त फिर से उन्हीं सड़कों से होकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने जाएंगे। जिसका आज तक कोई हला-भला न तो जिला प्रशासन करा पाया है, न ही यहां के जनप्रतिनिधि। बावजूद इसके साल दर साल बढ़ती हुई संख्या में शिवभक्त नंगे पाव अपने आराध्य का इसी सड़क से होकर जलाभिषेक करने जाते हैं। हर साल की तरह इस साल भी तकरीबन 6 लाख कांवड़िये अब से 24 घंटे बाद अपने आराध्य भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए इन रास्तों से होकर अलग-अलग शिवमंदिरों को कूच करेंगे। लेकिन जिन सडक़ों से होकर उन्हें आना-जाना है, उसकी हालत में रत्तीभर भी सुधार नहीं हो पाया है।
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कजरी तीज से एक दिन पहले करनैलगंज स्थित सरयूघाट से लाखो की संख्या में श्रद्धालु जल लेकर नंगे पाव शिवमंदिर जाते हैं। इन्हीं शिवभक्तों में तकरीबन तीन लाख से ऊपर कांवडिए हर साल करनैलगंज से 60 किलोमीटर दूर जहां भीम के स्थापित शिवलिंग भगवान पृथ्वीनाथ को अभिषेक करते हैं तो वहीं इतनी ही संख्या में शिवभक्त करनैलगंज से 30 किलोमीटर दूर गोंडा मुख्यालय स्थित दुखहरणनाथ मंदिर में भगवान शंकर को जल चढ़ाते हैं। लेकिन करनैलगंज से चाहे खरगूपुर स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर जाने वाली रोड हो या फिर गोंडा शहर में स्थित दुखहरणनाथ मंदिर की रोड, दोनों ही हालत बेहद खराब है। पूरी सडक़ जगह-जगह से उखड़ी पड़ी है। जिसपर कई जगह प्रशासन ने बोल्डर भी पटवा रखे हैं। इन सडक़ों से चलकर बुधवार को 6 लाख कांवड़िए अपनी आस्था का मिशाल पेश कर भगवान शंकर को जलाभिषेक करेंगे। जबकि ऐसा नहीं कि इन सडक़ों को लेकर आज तक कुछ नहीं हुआ। 7 साल पहले बसपा शासनकाल में मौजूदा वक्त भाजपा के ही विधायक ने आर्यनगर जाने वाली रोड पर धान की रोपाई की थी। इसी का नजीता रहा कि करनैलगंज से यह रोड कौंडिय़ा तक तो बन गई। लेकिन कौडिय़ा बाजार से आर्यनगर की रोड आज तक नहीं बन पाई। वहीं आर्यनगर से खरगूपुर जाने वाली रोड का तो हाल ही नहीं पूंछिए। इस सडक़ का कोई कोना ऐसा नहीं है, जिसके जख्म न उभरे हों। ऊपर से करनैलगंज से गोंडा आने वाली रोड का आलम तो यह है कि देखने में यह सडक़ कम तालाब और खाई ज्यादा नजर आती है। जिसकी उखड़ी पड़ी गिट्टियां शिवभक्तों के पैरों में गडने का इंतजार कर रही हैं। जबकि प्रशासन और जनप्रतिनधि हैं कि उन्हें इसकी तनिक भी फिक्र ही नहीं है।
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