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बाढ़ से बेजार पीड़ितों को नहीं मिल रहा उपचारं

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खाना तो दूर पीने के पानी भी मयस्सर नहीं
राहत और बचाव कार्यों में लापरवाही बनी आफत
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज (गोंडा)। बाढ़ के कहर ने लोगों की दुस्वारियां बढ़ा दी है। प्रशासन उनकी परेशानी को हल्का करने के लिए कोई उपाय नही कर रहा है। यहां तक कि बाराबंकी जिले के बाढ़ पीड़ितों को चार दिन बाद भी कोई राहत सामग्री नही दी गई है। जब कि माझा रायपुर, नैपुरा, परसावल, कमियार एवं बेहटा के सभी मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं।

बाढ़ प्रभावित ग्राम परसावल निवासी इंसपेक्टर यादव ने बताया कि पूरा परसावल, नैपुरा, कमियार एवं माझा रायपुर के साथ बेहटा गांव के सभी मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। लेकिन चार दिन बीतने को हैं अभी तक प्रशासन द्वारा कोई राहत सामाग्री नही दी गई है। जब कि गोंडा जिले के गांवों में प्रशासन राहत सामाग्री बंटवा रहा है। माझा रायपुर निवासी शंकर यादव कहते हैं कि माझा रायपुर, नैपुरा परसावल कमियार गांव के अधिकतर लोगों के मकान व उनकी संपूर्ण भूमि घाघरा नदी की जद में समा चुकी है। बांध के इस पार गांडा जनपद की सरहद पर सरकारी भूमि में झोपड़ी रखकर मेहनत मजदूरी करके लोग जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन बाढ़ के पानी ने सब कुछ छीन लिया। अब हमारे पास कुछ भी नही बचा है, जिससे अपना सुखमय जीवन बिता सकें।
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लीलावती कहती हैं कि चारो तरफ अब पानी ही पानी है। रहने को वतन, खाने को भोजन एवं दवा इलाज व प्रकाश के साथ ही पीने के लिए स्वच्छ जल की भी व्यवस्था नही है। जिससे हम लोग दूषित पानी पीने के लिए विवस हैं। उन्होंने कहा कि पशुओं का चारा भी नही रह गया है। लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई राहत नही दी गई है। कुमकुम देवी कहती हैं कि उनकी पुत्री मोनी व पुत्र करन के मुह के साथ पूरे शरीर में छाले निकले हैं। वहीं सोनी व अमन भी बुखार से पीड़ित हैं। पैसे भी नही हैं जिससे तबच्चों को कहीं ले जाकर इलाज कराया जाय। ऐसे में शिवा चुप रहने के कोई रास्ता नही बचा है।
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पीड़ितों के दर्द की कहानी उन्हीं की जुबानी
माझा रायपुर निवासी बद्री यादव की पुत्री सुमन बुखार से पीड़ित थी। घर के चारो तरफ पानी भर गया है, वह घर से सुरक्षित स्थान बांध पर आ रही थी। कि पानी में गिर गई, जब तक लोग उसे उठाने पहुंचे तब तक वह बाढ़ का गंदा पानी पी गई। अब उसककी हालात काफी खराब है, मगर इलाज की कोई व्यवस्था नही है। यदि यही हाल रहा तो लोग इलाज के अभाव में अपनी जान गवां बैठेंगे। माझा रायपुर निवासी पप्पू यादव बांध पर छप्पर रखकर अपना दिन गुजार रहे हैं। उसका डेढ़ वर्षीय पुत्र विवेक भूंख से पीड़ित होकर रो रहा था। घर में दूध भी नही था, उसे पप्पू चारपाई पर लेटा चुप कराने का प्रयास कर रहा था। वहीं पप्पू की पत्नी नीशा जल्दी दाल तैयार करने का प्रयास कर रही थी। जिससे वह उसे दाल का जूस पिलाकर उसे शांत करवा सके। रविवार को ग्राम घरकुइंया के मजरा सम्मयथान निवासी पत्तादेवी (60) की अचानक तवियत खराब हो गई। ठंढ लगकर बुखार आने से वृद्ध महिला का शरीर कांप रहा था। परिजन उन्हें बाढ़ राहत केंद्र पाल्हापुर लेकर आये। जहां केंद्र पर मौजूद डा0 एके गुप्ता ने तत्काल उसका इलाज किया, जिससे वृद्ध ने राहत की सांस ली।
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बाढ़ के पानी ने रोका रास्ता
बाढ़ राहत केंद्र पाल्हापुर से ग्राम नकहरा जाने वाले मार्ग पर जलभराव हो जाने से आवागमन प्रभावित हो गया है। वहीं पाल्हापुर शाहपुर मार्ग से ग्राम घरकुइंया व बांध होते हुए ग्राम परसावल को जोड़ने वाला मार्ग भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया है। घरकुइंया गांव के पास मार्ग पर बने पुल के ऊपर करीब डेढ़ फिट बाढ़ का पानी रविवार की शाम को हो गया था। ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार तक इस मार्ग का आवागमन पूरी तीह से बंद हो जायेगा। अब आने जाने का साधन केवल नाव ही रह जाएगा।
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