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और 20 मजरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी

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बाढ़ के पानी में 20 और गांव डूबे
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घाघरा का जलस्तर स्थिर लेकिन पानी का फैलाव जारी
कई गांव मुख्य संपर्क मार्ग से कटे
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज/गोंडा। करनलैगंज में कटे हुए एल्गिन-चरसड़ी व रिंग बांध से घाघरा नदी के पानी का फैलाव 40 से बढ़कर 60 मजरों में हो गया है। हालांकि नदी का जलस्तर शनिवार की अपेक्षा रविवार को खतरे के निशान से नीचे आकर स्थिर हो गया है। जिससे लोगों ने राहत की सांल ली है। वहीं बाढ़ के पानी से प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें अभी भी पहले जैसी ही हैं। खबर है कि शनिवार की शाम को दो लाख क्यूसेक पानी अलग-अलग बैराजों से घाघरा नदी में छोड़ा गया है। जिसके सोमवार तक जिले में पहुंचने की उम्मीद है। जिससे जलस्तर में फिर से बढ़ोत्तरी हो सकती हैं। वहीं रविवार को बंधे का जायजा लेने पहुंचे जिलाधिकारी ने बताया कि घाघरा नदी का पानी अब घट रहा है, इससे जिन गांवों में अभी तक घुटनों तक पानी भरा था, वहां के लोगों को राहत मिलेगी। बाढ़ क्षेत्र में बचाव व राहत कार्यों की भी यहां डीएम ने समीक्षा की।
करनैलगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम नकहरा के मजरों खालेपुरवा, राधेपुरवा, अयोध्या पुरवा, सांवलपुरवा, जवाहरपुरवा, कोरिनपुुरवा, पाहिनपुरवा में जलभराव के बाद शनिवार को बाढ़ का पानी ग्राम काशीपुर एवं उसके मजरे धोविनपुरवा, गोहटटा, हनुमानपुुुरवा, टेपरा, रेता पुरवा, वैद्यपुरवा, जगन्नाथ पुरवा, लल्लन बउडीहपुरवा, अमरेशपुरवा तथा ग्राम पंचायत घरकुंइयंा के मजरा नऊवनपुरवा, धनलाल प्रधानपुरवा, राजभवन पुरवा, गोडियनपुुरवा, कुल्ही पुरवा, उत्तरीपुरवा, चन्दुलहन पुरवा, सरजू महतव पुरवा, भरभरियन पुरवा, इसके साथ ही ग्राम रेक्सड़िया के मजरा चौरसियन पुरवा, पृथीराजपुरवा, झोलहन पुरवा, चंडीपुुरवा, कटका पुुरवा, विलास पुरवा, भवानी पुरवा को शनिवार की रात पानी में बाढ के पानी ने घेर लिया। तो अतरसुइया, नकार, पूरे अजब, बहुवन मांझा के मजरों में भी पानी तेजी से फैलने लगा है।
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इसके अलावा गाेंडा जिले की सीमा पर बसे बाराबंकी जिले (प्रस्तावित गोंडा के गांव) 29 मजरों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालांकि पानी के फैलाव से बाढ की स्थिति काबू में है। अब तक करीब 60 गांव ऐसे हैं जहां बाढ़ का पानी भरा हुुआ है। घरकुंइया से परसावल व बांध को जोड़ने वाले पुल पर पानी आ गया है। इससे करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के साथ बांध को जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। जहां कल तक लोग साइकिल एंव पैदल आते जाते थे। आज वहां नाव से लोगों को निकलना पड़ रहा है, जबकि नकहरा व काशीपुर के करीब एक दर्जन से अधिक मजरों का सम्पर्क मुख्य मार्ग से कट चुका है। इसलिए लोगों को नावों के सहारे ही आना-जाना पड़ रहा है। रविवार को घाघरा नदी खतरे के निशान 106.07 से 0.02 सेमी नीचे आकर स्थिर हो गई थी। जिसके बैराजों से छोड़े गए पानी के जिले की सीमा में आते ही फिर से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि जिलाधिकारी जेबी सिंह का कहना है कि बाढ़ क्षेत्र की हरेक गतिविधि पर प्रशासन की नजर है। पानी घटने की शुरूआत हो चुकी है। इससे लोगों को राहत मिलेगी।
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इनसेट
बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ने के आदेश
डीएम जेबी सिंह ने वर्तमान में जनपद में बाढ़ की स्थिति के दृष्टिगत जनपद के समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों की छुट्टियां निरस्त करते हुए बिना अनुमति के मुख्यालय न छोड़ने के आदेश दिए हैं। यह जानकारी देते हुए डीएम सिंह ने बताया कि बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्यवाही की जाएगी।
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