गोंडा। अधिवक्ता अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में आंदोलन के दौरान संघ व पदाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी और अभद्र टिप्पणी के मामले में सिविल बार एसोसिएशन ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित 13 अधिवक्ताओं की सदस्यता निलंबित कर दी है। सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। वहीं सदस्यता से त्यागपत्र देने वाले संयुक्त मंत्री और तीन सदस्यों का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है।
शुक्रवार को सिविल बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी की बैठक हुई। मीटिंग में सर्वसम्मत से निर्णय लेते हुए सिविल बार एसोसिएशन ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राम बुझारथ द्विवेदी, सदस्य सुरेंद्र कुमार मिश्र, सुरेंद्र नाथ मिश्र द्वितीय, अवधेश कुमार श्रीवास्तव, उदयभान मिश्र, अमित कुमार दूबे, भगवती प्रसाद पांडेय, सुशील कुमार मिश्र, प्रभात कुमार शुक्ल, महराज कुमार श्रीवास्तव, रमेश कुमार चौबे, हिमांशु ओझा व देवन मिश्रा की सदस्यता निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब 15 दिन में न देने पर अधिवक्ता पंजीयन निरस्त करने के लिए बार काउंसिल आफ उप्र को पत्र भेजा जाएगा।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार मिश्र व महामंत्री मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि संयुक्त मंत्री बलराम बाबू शुक्ला और सदस्य रितेश यादव, राजीव कुमार और राज कुमार द्विवेदी की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से भेजे गए त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया गया है। संघ का अपमान करने के कारण इन्हें भविष्य में सिविल बार एसोसिएशन का सदस्य न बनाने का निर्णय लिया गया है।