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पंजीकरण नहीं कराया तो सरकारी योजनाओं से वंचित होंगे नवविवाहित

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शादी का पंजीकरण नहीं तो सरकारी लाभ भूल जाएं
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विवाह का पंजीकरण होगा अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। अगर आप निकट भविष्य में विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। अब विवाह साथ आपको उसका रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। इसके बगैर सरकारी योजनाओं के लाभ से भी आपको वंचित कर दिया जाएगा। योगी सरकार ने विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए महिला कल्याण विभाग को विवाह पंजीकरण के लिए नियमावली बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार के तमाम प्रयासों और जन जागरूकता के बावजूद कई जगहों पर बाल विवाह जैसी कुरीतियां खत्म नहीं हो रही हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि विवाह का पंजीकरण न होने के कारण अक्सर पुरुष वर्ग अपने जिम्मेदारियों से महिला उत्पीड़न के मामलों में भी बाढ़ सी आई हुई है। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने के आदेश दिए थे। सुप्रीम घटनाओं के आदेश के बाद कुछ राज्यों ने तो अपने यहां यह व्यवस्था लागू कर दी लेकिन यूपी में यह व्यवस्था नहीं लागू हो सकी थी। अब योगी सरकार ने विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार की तरफ से महिला कल्याण विभाग को विवाह पंजीकरण नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नियमावली के लागू होने के बाद विवाह करने वाले जोड़ों के लिए विवाह का पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा। अगर कोई पंजीकरण नहीं कराता है तो उसे सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जायेगा। इस नियमावली से लोगों को काफी सहूलियतें भी मिलेगी। इससे बाल विवाह पर अंकुश लगाया जा सकेगा तो पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरे विवाह पर रोक लग सकेगी। साथ ही पति के न रहने के बाद उसकी पत्नी को उसके अधिकार आसानी से मिल सकेंगे।
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पहले से विवाहित को मिलेगी छूट
विवाह नियमावली के अपले जिन लोगों की शादी हो चुकी है उन्हें पंजीकरण से छूट रहेगी। लेकिन इस नियमावली के लागू होते ही नवविवाहित जोड़ों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा। विवाह के बाद देर से पंजीकरण कराने पर जुर्माना भी देना होगा।
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अल्पसंख्यक समुदाय को भी कराना होगा पंजीकरण
विवाह पंजीकरण की नियमावली हिंदुओं के साथ साथ मुस्लिमों के लिए भी जरुरी होगी। उन्हे भी अपनी शादी के पहले इसका पंजीकरण कराना होगा। पूर्ववर्ती सरकार ने मुस्लिमों को इस नियमावली से राहत देने का मन बनाया था लेकिन तब यह नियमावली परवान नही चढ़ सकी थी। अब जब नए सिरे से इसकी कवायद की जा रही है तो योगी सरकार मुस्लिमों को भी राहत देने के मूड में नही है।
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शादियां दो हजार, पंजीकरण दो सौ का भी नहीं
अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में हर साल करीब दो हजार शादियां होती है। इनमें जिले में स्थित मैरिज हाल, गेस्ट हाउस, आर्य समाज मंदिर समेेत 20 ऐसे स्थान है जहां तीन सौ से चार सौ शादियां कराई जाती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष करीब 15 सौ शादियां सपन्न होती है लेकिन इनमें से सिर्फ दो सौ के करीब शादियों का ही पंजीकरण कराया जाता है। रजिस्ट्री विभाग के सब रजिस्ट्रार मुखराम सिंह ने बताया कि उनके यहां औसतन हर महीने में 10 से 12 विवाह का पंजीकरण कराया जाता है।
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10 रुपये में कराएं विवाह का पंजीकरण
विवाह का पंजीकरण कोई बहुत खर्चीला ही है। इसके लिए विवाह करने वाले जोड़े को सिर्फ 10 रुपये खर्च करने होंगे। इसके लिए अब आनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू है। इसके लिए विवाहित जोड़े को पंजीयन विभाग की वेवसाइट आईजीआरएस.यूपी.जीओवी.इन पर लागइन करना होगा और बस कुछ ही देर में विवाह का पंजीकरण हो जायेगा। इसके अलावा पंजीयन आफिस जाकर भी विवाह का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।
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