खनन करने वालों ने दबा लिए जीएसटी के सवा दो करोड़
गोंडा। जिले में बालू खनन करने के काम में लगी फर्में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का 2.14 करोड़ दबाए बैठी हैं। खनन करने वाली फर्मों को खनन के लिए जमा की गई रॉयल्टी पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी जमा करनी है।
अभी तक कई फर्मों ने वाणिज्य कर विभाग में पंजीयन तक नही लिया है। वाणिज्य कर विभाग अब रॉयल्टी जमा कर बालू खनन करने वाली फर्मो पर जांच का शिकंजा कसा है।
जिले में पांच फर्मों की ओर से पांच स्थान पर बड़े पैमाने पर बालू खनन का पट्टा हथियाया है। इसमें से एक दिल्ली व दो-दो फर्में गोंडा व लखनऊ की हैं। इन पांच फर्मो की ओर से जिले के भूतत्व और खनिकर्म विभाग को करीब 11.87 करोड़ रुपये की रॉयल्टी अदा किया जाना है।
कुल रॉयल्टी पर 18 प्रतिशत की दर से करीब 2.14 करोड़ रुपये की जीएसटी की देयता बनती है। जीएसटी को बालू खनन में लगी कंपनियां दबाए बैठी हैं। शासन की नयी खनन नीति 2017 में खनन की रायल्टी पर 18 प्रतिशत जीएसटी की देयता भी निर्धारित की गई है।
बताया जाता है कि खनन के काम में लगी फर्मों के पीछे बड़े बड़े राजनीतिक रसूखदारों का हाथ है बल्कि यूं कहें कि अधिकतर फर्मों को बड़े बड़े पूर्व के माफियाओं व नये माननीयों के घरानों के लोगों ने हथिया रखा है। जिससे टैक्स व रायल्टी की वसूली भी विभागों के सामने टेढ़ी खीर जैसी है।
वहीं इस मामले में वाणिज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर/मोबाइल टीम प्रभारी संतोष कुमार सिंह का कहना है कि जिले की एक फर्म की ओर से अभी हाल में ही 51 लाख रुपये जीएसटी के जमा कराये गये हैं।
अन्य फर्मो को जीएसटी जमा न करने की नोटिस जारी की जा रही है। जल्द रायल्टी पर 18 प्रतिशत जीएसटी जमा न करने वाली फर्मों के खनन की जांच रिपोर्ट तैयार कर जुर्माना व आरसी की कार्रवाई की शुरू की जाएगी।
जिले में खनन का पट्टा पाने वाली यह हैं फर्में
एपीएम माइनिंग एंड इन्फ्रा प्राईवेट लिमिटेड दिल्ली
नन्दिनी इन्फ्रास्ट्रक्चर गोंडा
आराध्या इंटर प्राइजेज लखनऊ
कुमार कांस्ट्रक्शन लखनऊ
नंदिनी इन्फ्रास्ट्रक्चर गोंडा
बालू खनन का आवंटित पट्टा स्थल व एरिया
* परास पट्टी मझवार- 10.980 हेक्टेयर
* सोनौली मोहम्मदपुर प्रथम- 6.00 हेक्टेयर
* सोनौली मोहम्मदपुर द्वितीय- 6.00 हेक्टेयर
* दुर्गागंज माझा - 24.00 हेक्टेयर
* तुलसीपुर माझा- 38.44 हेक्टेयर
* तुलसीपुर निजी भूमि पर- 3.2 हेक्टेयर
एसआईबी खनन फर्मों की इन बिंदुओं की करेगी जांच
खनन करने वाली फर्म वाणिज्य कर में पंजीकृत है कि नही
पंजीकृत फर्मों में से कितनी रिटर्न दाखिल कर रही है कितनी नही कर रही
कितनी फर्मों ने रायल्टी की धनराशि पर कर दायित्व पर आरसीएम बेसिस पर जमा किया है।
बांध, रेलमार्ग आदि के किनारे खनन की अलग बनेगी रिपोर्ट
गोंडा। शासन के निर्देश वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी अपने जांच में इस बात की अलग रिपोर्ट तैयार करेंगे जहां पर बांध रेलमार्ग आदि के कि नारे खनन किया जा रहा हो।
ऐसा माना जा रहा है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गलत तरीके से खनन पर सख्त रुख अपनाए जाने पर ऐसी व्यवस्था की गई है। फिल हाल बालू के खतरनाक तरीके से बालू के अवैध खनन को लेकर न सिर्फ गोंडा सुर्खियों में रहा है बल्कि गोंडा के अवैध खनन के मामले को एनजीटी ने जांच भी की जिसका मामला लंबित है।
जिले के नवाबगंज ब्लाक के चकरसूल गांव के पास बालू के अवैध खनन से न सिर्फ बड़ा एरिया ऊसर व तालाब बन गया है। बल्कि उससे वहां के आसपास की आबादी व पास से गुजरने वाली रेल लाइन को भी खतरा पैदा हो गया है।
इस मामले में एनजीटी की सख्त रूख के बाद जिला प्रशासन बालू के अवैध खनन में संलिप्त वहां के हाफिज अली व उसके चार भाइयों पर मुकदमा दर्ज कर उसकी सम्पत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई कर रखी है।
ऐसे में अब ऐसे खनन न हों जिससे बांध, सड़क, रेल मार्ग, व्यावसायिक कांपलेक्स, माल, ईंट भट्ठों के आसपास होने वाले मिट्टी, रेत, खनिज के हो रहे खनन की विशेष रिपोर्ट बनेगी।
रॉल्यटी पर टैक्स न देने वाली फर्मों पर होगी कार्रवाई
मिट्टी,बालू,खनिज आदि का व्यावसायिक खनन करने वाली फर्मो की ओर से देय कुल रायल्टी की रकम पर 18 जीएसटी दिए जाने का भी प्रावधान है। अधिकतर फर्मों ने खनन पर जमा की गई रायल्टी के मुताविक विभाग में जीएसटी की रकम जमा करने की कार्रवाई पूरी नही की है।
गोंडा की मात्र एक फर्म से टैक्स जमा कराया गया है। एक सप्ताह में जीएसटी न जमा करने वाली फर्मो की जांच कर उनपर टैक्स के साथ जुर्माने जमा कराने की कार्रवाई की जाएगी। ’
- डीपी साहू, जेसी एसआईबी वाणिज्य कर