बाढ़ में डूबने से युवक की मौत
मिटने के कगार पर एल्गिन चरसड़ी बांध का वजूद
लोगों के लिए दिखावा साबित हो रहा राहत कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज/नवाबगंज (गोंडा)। घाघरा का उफान पिछले डेढ़ माह से जारी है। रविवार को नवाबगंज के लोलपुर गांव के समीप क्षेत्र के इस्माइलपुर निवासी युवक की सरयू में आई बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार मनीराम (40) पुत्र रघुवीर रविवार की सुबह अपने घर से शौच के लिए लोलपुरपुल के पास गया था, शौच के लिए बाढ़ के पानी के पास पहुँचने पर पानी का अंदाजा न लगा पाने के कारण मृतक का पैर पानी में फिसल गया और उसकी डूब कर मौत हो गई। उक्त जानकारी गांव के कुछ लोग शौच के लिए बाहर निकल तो देखा कि एक शव गहरे पानी में चार रहा था, जब लोगों ने शव को पानी से बाहर निकाला तो देखा कि यह उनके ही गांव का मनीराम है। इस घटना के बाबत प्रधान प्रतिनिधि संत कुमार यादव ने बताया कि मनीराम बाढ़ के पानी मे डूबने से मौत हो गयी है। इसकी सूचना क्षेत्रीय लेखपाल को दी गई है।
वहीं करनैलगंज में घाघरा खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। ग्राम नकहरा के सामने एल्गिन-चरसड़ी बांध का वजूद समाप्ति की ओर है। एल्गिन-चरसड़ी बांध का 280 मीटर हिस्सा नदी में समा चुका है और करीब 300 मीटर में बांध में दरार आ गई है।
बल्ली पाइलिंग, ब्रिकरोरा, पेड़ों की डाल एवं बालू भरी बोरियों को डाल कर कटान रोकने की कवायदें बेकार साबित हो रही हैं। नदी के इस उग्र रूप को देखकर बांध बचाव कार्य में लगे अधिकारियों ने हाथ खड़े कर लिए हैं। बीते दो दिनों में करीब 280 मीटर से अधिक बांध का हिस्सा नदी में समा चुका है। ग्राम नकहरा के सामने तो बांध का हिस्सा पूरी तरह कट चुका है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि बांध पर नदी की धारा का दबाव लगातार बना हुआ है। बांध को बचाने के जिस सामग्री की आवश्यकता होती है, वह सामग्री बांध पर नहीं आ पा रही है। गांव में पानी भरा है और बांध पर ग्रामीणों ने शरण ले रखी है। जिससे सामग्री लाने में अवरोध एवं बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है।
150 गांवों में चल रहीं नावें, नारकीय हुआ जनजीवन
करनैलगंज। करनैलगंज तहसील की बाढ़ से प्रभावित 102 ग्राम पंचायतों के 824 मजरों में से करीब 60 ग्राम पंचायतों के 450 मजरे अभी भी बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित है। बाकी मजरों को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है या फि र गांव में दलदल या कीचड़ से ग्रामीणों का निकलना मुहाल है। घाघरा के मुहाने पर बसे गांवों में अभी भी भीषण बाढ़ है। गांवों में करीब पांच से 10 फुट तक पानी भरा हुआ है। करीब 150 गांवों में नावें चल रही हैं। इसके अलावा पसका क्षेत्र में बाढ़ का कहर अभी जारी है। ग्राम नकहरा, काशीपुर, घरकुइयां, बहुवन मदार माझां, गौरा सिंहपुर, रेक्सडिय़ा, प्रतापपुुर, बसेरिया पूरेअंगद, पूरेअजब, परसावल, नैपूरा, कमियार, बेहटा, मांझा रायपुुर सहित तमाम ग्राम पंचायतों को बाढ़ के पानी ने पूरी तरह से घेर रखा है।