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13 मजरों में भरने लगा बाढ़ का पानी

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करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार की रात में घाघरा के पानी ने बाढ़ से प्रभावित करीब एक दर्जन मजरों को फिर से घेर लिया है। हालांकि पानी से गांव घिर गए हैं। यदि पानी बढ़ा तो गांवों में पानी फिर से भरना शुुरू हो जाएगा। एक तरफ घाघरा का जलस्तर स्थिर होने के साथ धीरे-धीरे घट रहा है। बांध के हिस्से में कटान ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बांध के दोनों कटों में कटान लगी हुई है। जिसे रोकने की जद्दोजहद नाकाफी साबित हो रही है।
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गुरुवार को घाघरा में पानी का जलस्तर सुबह 105.906 था, वहीं शाम के समय घटकर 105.846 पर पहुंच गया। तेजी से घाघरा का जलस्तर घटता रहा। वहीं बांध में कटान तेज होती गई। बुधवार को घाघरा के बढ़े जलस्तर से पानी करनैलगंज तहसील के उन गांवों व मजरों में फै लने लगा, जहंा से पानी घटने लगा था। करीब 13 मजरे जो घाघरा के तटीय इलाकों एवं बांध के किनारे है। जिनमें पानी बढ़ने लगा। मगर गुुरुवार की सुबह से नदी का जलस्तर घीरे-धीरे घटने लगा। बाढ़ प्रभावित मजरों में नकहरा के तीन, काशीपुर के तीन, प्रतापपुर के दो, घरकुइंया के छह, बसेरिया के पांच, मोहम्मदपुर गढ़वार के एक, भटपुरवा के चार, अतरसुइया के चार पूरेअंगद के नौ एवं वैद्यपुर शामिल हैं। बाढ़ से प्रभावित गावों के ग्रामीणों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है, बल्कि दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। वहीं बाढ़ का पानी प्रति दिन तेजी के साथ क्षेत्र में फैलता जा रहा है। तथा जिले की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा के 34 मजरे पहले से ही बाढ़ प्रभावित हैं। गुरुवार को घाघरा का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा था खतरे के निशान से घाघरा नीचे आ गई। कटान रोकने के तमाम तरीके के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिशासी अभियंता सिंचाई विश्वनाथ शुक्ला मौके पर स्वंय कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कटान रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे बांध के हिस्से को बचाया जा सके।

बाढ़ पीड़ितों की सुनी समस्याएं
करनैलगंज (गोंडा)। ग्राम कमियार, नैपुरा, परसावल, मांझा रायपुर एंव बेहटा को जाने वाले मार्ग पर लगातार जलभराव की स्थिति बनी हुई है। तहसीलदार सिरौलीगौसपुर शिवमूर्ति सिंह एवं अन्य राजस्व व बाढ़ कर्मियों ने बाढ़ पीड़ितों को तिरपाल एवं भोजन के पैकेट बांटने के लिए टैक्टर ट्रॉली पर सवार होकर करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम घरकुंइया होकर बांध पर पहुंचे। जहंा बाढ़ पीड़ितों की समस्या को सुना।
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तेज आंधी में उड़ गई बाढ़ पीड़ितों की झुग्गी
करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा के तटीय इलाकों में रात के समय आई तेज आंधी ने जमकर तबाही मचाई। बांध पर आशियाना बनाकर जीवन गुजर कर रहे बाढ़ पीड़ितों के सिर से तिरपाल की छाया भी गायब हो गई। तेजी से हो रही कटान से बांध के टूटने का खतरा बढ़ गया है।
बुधवार की रात बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए बेहद कष्टकारी साबित हुुई। घाघरा नदी में उठे चक्रवाती तूफान ने रात में करीब 11 बजे अचानक बांध पर बसे लोगों की झोंपडियों को उड़ाना शुरू कर दिया। तेज हवाओं के झोकों ने बाढ़ पीड़ितों के सिर से तिरपाल एवं छप्पर, झुग्गी, झोंपड़ी को उड़ा कर घाघरा में समाहित कर दिया। ग्राम रायपुर,, कमियार, परसावल, एवं नैपुरा, नकहरा, काशीपुर के करीब 300 से अधिक परिवार बांध व उसके नीचे मजरों में निवास करते हैं। जिनके आशियाने बाढ़ से प्रभावित हैं। उन लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए बांध को सहारा बनाया तो चक्रवात ने वहां से भी उजाड़ दिया। ग्रामीणों में रामनेवाज, सत्यपाल, छोटेलाल, संगमलाल, मंगल यादव, सुभाष चन्द आदि ने बताया कि रात के समय सभी लोग बांध पर अपने आशियाने में सो रहे थे। तभी अचानक नदी की ओर से तेज तूफानी हवाओं का झोंका आया और सबकुछ उड़ा कर किनारे लगा दिया। अधिकांश बाढ़ पीड़ितों के आशियाने व छाजन उड़ गए। बाढ़ पीड़ितों के मुताबिक रामहरख, दुखी:, शिवनरेश, राममनोरथ, शिवपूजन यादव, रामलाल, आदि समेत करीब दो दर्जन से अधिक लोगों की झुग्गी उजड़ गई। एसडीएम सिरौली गौसपुर अजय सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की झुग्गी झोपड़ी उड़ जाने की सूचना मिली है मौके पर तहसीलदार सिरौली गौसपुर शिवमूर्ति सिंह को भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने पर पीड़ितों को सहायता मुहैय्या कराई जाएगी।
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