बचा-खुचा चरसड़ी बांध भी घाघरा में समाया
करीब 700 मीटर बंधा कटने से मचा हाहाकार
आसपास के गांवों में बाढ़ के और भयावह होने की आशंका
करीब 60 गांव पानी से घिरे, प्रशासन की नजर में सिर्फ 13 गांव प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज (गोंडा)। एल्गिन-चरसड़ी बांध का नकहरा व काशीपुर गांव के पास बना कट-1 व कट-2 का करीब 700 मीटर भाग सोमवार को घाघरा में समा गया है। इससे नकहरा, काशीपुर, घरकुइयां, प्रतापपुर, परसावल, रायपुर सहित दर्जनों गांव सीधे घाघरा के मुहाने पर आ गए हैं। बांध का करीब दो सौ मीटर हिस्सा पिछले साल नदी में समा गया था।
घाघरा का कहर सोमवार को और बढ़ गया। सोमवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध का करीब 700 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। नकहरा व काशीपुर गांव के पास एल्गिन-चरसड़ी बांध का करीब 200 मीटर हिस्सा बीते वर्ष कट गया था जो मौजूदा समय करीब एक किलोमीटर तक हो गया। जिस स्थान पर बांध कटा था उसके दोनों छोर पर बने कट-1 व कट-2 का करीब 700 मीटर सोमवार को नदी में समा गया। इससे नकहरा, काशीपुर, घरकुइयां, प्रतापपुर, परसावल, रायपुर सहित अन्य ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांव सीधे घाघरा के मुहाने पर आ गए हैं। इससे क्षेत्र में हाहाकार की स्थिति है। इतना ही नहीं नकहरा का मजरा धोबिनपुरवा पूरी तहर से वीरान हो गया है। गांवों में कमर तक पानी बह रहा है। नाव व पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से कोई खास व्यवस्था नहीं हो पायी है। प्रशासन के पास देखने के सिवाय और कोई रास्ता भी नहीं है। कारण बांध का करीब पौने दो किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह से अब तक समा चुका है और नदी की धारा करनैलगंज की ओर मुड़ चुुकी है। करनैलगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा का फैलाव होने के कारण नवाबगंज क्षेत्र व तरबगंज क्षेत्र बाढ़ से सुरक्षित हो गए हैं। लेकिन करनैलगंज वासियों के लिए मुसीबत बढ़ गई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण लगातार हो रही बारिश भी है जिससे न तो बाढ़ पीड़ितों को निजात मिल पा रही है और न ही प्रशासन ही चाहकर मदद कर पा रहा है। करनैलगंज तहसील के करीब 60 मजरे पानी से घिर चुके हैं और अब पानी का फैलाव सोती नाला से होकर परसपुर के बहुअन मदार माझा व पूरे अजब गांव की ओर होने लगा है। वहीं एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान 106.07 से 17 सेमी नीचे 105.896 मीटर पर जाकर स्थिर तो हो गई है। लेकिन इसके पानी का फैलाव करनैलगंज के गांव/मजरों में होना अभी भी जारी है। लेकिन प्रशासन करनैलगंज में 13 मजरों को ही बाढ़ से प्रभावित मान रहा है।
इनसेट
उफनाए चंदहा नाले से आधा दर्जन मजरों में भरा पानी
तेज बारिश के चलते गोंडा-लखनऊ मार्ग पर स्थित चंदहा नाला उफना गया है। इसका पानी तीन ग्राम पंचायतों के आधा दर्जन मजरों मे भर गया है। जिससे किसानों को फसल खराब होने का भय है। चंदहा नाला में पानी के ठहराव की सबसे बड़ी वजह गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बनाया जाने वाला पुल है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल बनाने के लिए सडक़ पर नाले को पाट दिया गया है। जिसका पानी उनके गांव व खेतों में भर रहा है। लखनऊ रोड पर ग्राम पंचायत गोनवा के पास पुल संख्या 214 का निर्माण चल रहा है। पुल बनाने के लिए इधर से होकर गुजरने वाले चंदहा नाले को पाट दिया गया है। बरसात के चलते नाले में पहले से ही काफी पानी जमा हो गया था। सोमवार की सुबह हुई तेज बारिश से नाला उफान पर आ गया। जिसके चलते ग्रामपंचायत गोनवा के मंगलपुरवा, गौरवाखुर्द के मजरा भदैयन पुरवा व कोंचाकासिमपुर का मजरा कुटटी प्रभावित हो गए। गोनवा के प्रधान शिवपूजन गोस्वामी ने बताया कि नाले का पानी किसानों के खेतो में भर गया है। जिससे मक्का व धान की फसले बरबाद होने का अंदेशा है। फोरलेन रोड निर्माण में लगी एचडीपीएल निर्माण एजेंसी के अभियंता बृजेश यादव ने बताया कि नाले पर पुल का निर्माण बरसात से पहले ही कर लेने का अनुमान था। पर खनन पर लगी रोक के चलते बालू व मोरंग के न मिलने से निर्माण में देरी हो गयी। जिससे नाले में पानी जमा हो गया और नाला उफान पर आ गया।
वर्जन
नकहरा, काशीपुर के 10 मजरे बाढ़ से प्रभावित थे जिनकी संख्या अब बढकर 13 हो गई है। घरकुंइया के तीन मजरों में सोमवार को पानी भर गया है। जहां पर नावें लगा दी गई हैं। यहां बाढ़ पीड़ितों के लिए अन्य इंतजाम कराये जा रहे हैं।
-रमेश बाबू, तहसीलदार, करनैलगंज