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बाढ़ की चपेट में 300 गांव, छह मकान कटे

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गोंडा। चार दिनों तक स्थिर रहने के बाद गुुरुवार को घाघरा ने रौद्ररूप धारण कर लिया। विभिन्न बैराजों से छोड़े गए करीब पौने चार लाख क्यूसेक पानी ने गुरुवार को करनैलगंज व तरबगंज तहसील क्षेत्रों के करीब 300 गांवों को पेट में ले लिया है। कई दर्जन सड़कें कट कर घाघरा में समा गई हैं और तीन हजार से अधिक परिवार घरबार छोड़ कर सुरक्षित स्थान के लिए पलायन कर गए हैं।
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बेहटा ग्राम पंचायत के चरपुरवा में घाघरा नदी में छह मकान समा गए। इस गांव के लोग अपना सब कुछ छोड़कर जा चुके हैं। करीब 9 ग्राम पंचायतों के दो दर्जन मजरे सरयू में आई बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। करनैलगंज इलाके में घाघरा और सरयू नदी में आई बाढ़ की चपेट में अब तक 126 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

केन्द्रीय जल संस्थान आयोग एल्गिन ब्रिज घाघरा घाट से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की रात 2 बजे नेपाल के विभिन्न बैराजों से छोड़ा गया करीब पौने चार लाख क्यूसेक पानी अब यहां से गुजर रहा है। जिससे गुरुवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के 106.766 रहा। जो कि खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर तक पहुंच चुका है।
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बुधवार से लगातार सरयू, शारदा व गिरिजा बैराजों का टोटल डिस्चार्ज करीब पौने तीन लाख के आस पास बना हुआ था। अभी तक करनैलगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा के पानी से पाल्हापुर बाढ़ राहत केन्द्र के अंर्तगत काशीपुर, पाल्हापुर, चन्द्रभानपुर, नकार, वैदपुर व घरकुइंया आदि गांवों के करीब तीन दर्जन मजरें प्रभावित हो चुके हैं। तो निकटवर्ती ग्राम परसावल, कमियार, नैपूरा, रायपुर, बेहटा के दो दर्जन से अधिक मजरे बाढ़ के पानी से प्रभावित हो चुके हैं।

बेहटा ग्राम पंचायत का चर पुरवा गांव बिल्कुल समाप्ति की ओर है। इस ग्राम पंचायत के मात्र दो मजरे चर पुरवा और नए पुरवा हैं। चर पुरवा मजरे में मात्र 13 लोगों के घर हैं। जिसमें से रामबहादुर, जग्गू, लखनलाल, शिवराम, दीना एवं सुलिया का घर घाघरा नदी ने काटकर अपनी धारा में समाहित कर लिया है। पल्हापुर, गौरासिंहपुर बाढ़ राहत केन्द्र के दो दर्जन मजरे एं लगभग 6 हजार की आबादी प्रभावित बतायी जा रही है।

कमियार, सकरौरा, कुर्था, कंचनापुर, मलौना में दर्जनों मजरों में पानी भर जानें से लोग परेशान है। उधर, समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने बाढ़ ग्रस्त गांवों में मंगलवार को जाकर गांवों के लोगों से बाढ़ राहत मिलने तथा बाढ़ की स्थिति पर अपने मताहतों से जानकारी ली। प्रशासन के लोगों को बाढ़ के बाबत दिशा निर्देश भी दिया। एसडीएम तरबगंज सौरभभट्ट ने बताया कि बाढ़ के पानी पुन: बढने से बारह ग्राम पंचायत के करीब 120 गांव प्रभावित है।

रिहायशी इलाकों में भर रहा पानी
उमरीबेगमगंज (गोंडा)। तरबगंज तहसील क्षेत्र के भिखारीपुर सकरौरा तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी के साथ रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले रहा है। कुल 77 मजरों सहित 12 हजार की आबादी प्रभावित हो चुकी है और करीब 1200 परिवार बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। सोनौली मोहम्मदपुर के 77 और ऐलीपरसौली का एक मजरा बाढ़ से प्रभावित हो चुका है।

ऐलीपरसौली में अभी कोई पुरसाहाल नहीं है। दूसरी तरफ ऐली परसौली में तटबंध के बाहर दक्षिण दिशा में करीब 500 से अधिक परिवार बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। यहां प्रशासन की तरफ से नाव के अलावा और कोई मदद नहीं पहुंचाई जा रही है। केवटाही मजरे के पास कटान से मुन्ना पुत्र सितई का फूस का आशियाना नदी में समाहित हो गया।

वहीं गढी माझा परास जबर नगर में भी बाढ़ का प्रकोप दिखने लगा है। बृहस्पतिवार को तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडे ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर सोनौली मोहम्मदपुर, ऐलीपरसौली में बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना व बाढ़ चौकी पर पहुंचकर राहत सामग्री सभी पीड़ितों तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
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