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घटती घाघरा किसानों की निगल गई 12 सौ बीघे जमीन5

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किसानों की 12 सौ बीघा निगल गई घाघरा

गोंडा। घाघरा लगातार घट रही है लेकिन उसने अब तक किसानों की 12 सौ बीघे जमीन को निगल लिया है। एक सप्ताह पहले जहां फसलें लहलहा रही थी वहां अब नदी की धारा बह रही है।

नदी का जलस्तर गिरने से सिंचाई विभाग व बाढ़ राहत कार्य में लगे अधिकारियों व कर्मियों ने राहत की सांस ली है और तेजी से बांधों की मरम्मत कार्य करने में जुट गए हैं।
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गत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष घाघरा नदी के रौद्र रूप में बदलाव आया है। करीब छह किलोमीटर की परिधि में घाघरा ने अब तक करीब 12 सौ बीघा कृषि योग्य भूमि को काटकर नदी में समाहित कर लिया है।

एल्गिन चरसड़ी बांध के समीप वाले ग्राम पारा, बेहटा, नकहरा, काशीपुर, परसावल, कमियार गांव ऐसे हैं जो नदी के किनारे बने बांध से सटे हुए हैं और इसमें तीन गांव बांध के अंदर हैं।

जिससे गांव के ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि को घाघरा नदी अपना लगातार निशाना बनाती जा रही है। मगर शनिवार को नदी का पानी घटने के साथ कटान भी रुक गई है। गत एक सप्ताह के भीतर घाघरा नदी में पहाड़ी नालों के पानी से हुई बढ़ोतरी ने लोगों को सकते में डाल दिया था और करनैलगंज में घाघरा नदी का पानी घुसने को बेताब था।

वहीं अब घाघरा का जल स्तर लगातार तेजी से घट रहा है। शनिवार को घादघरा का जलस्तर घटकर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 104.236 पर पहुंच गया। जो खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे हो गया।

जेई एमके सिंह ने बताया कि घाघरा इस बार घटते समय कटान नहीं कर रही है जो भी कटान कर रही है वह न के बराबर है और अभी नदी का जलस्तर घट रहा है जिससे न तो बांध को या किसी गांव को कोई खतरा है। बांध पर मरम्मत कार्य जारी है।

ग्रामीणों में बरकरार है दहशत
नकछेद, राम उजागर सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि 15 जुलाई से अगस्त के मध्य अक्सर नदी में बाढ़ आती है। अभी तो नाम मात्र की बारिश हुई है। जैसे ही बारिश तेज होगी और पहाड़ों से पानी छोड़ा जाएगा उन लोगों की मुसीबत बढ़ जाएगी। नदी में जो बांध पहले बना था वह अभी भी कटा पड़ा है। इसके इतर अलग बांध बनाया जा रहा है।

फिर बढ़ी घाघरा तो तीन गांवों का खत्म हो जाएगा अस्तित्व

एल्गिन-चरसड़ी बांध नकहरा, काशीपुर के पास से होकर गुजरा है। बीते वर्ष बांध करीब तीन किलोमीटर तक कटकर नदी में समा गया था। इस बार उस बांध को छोड़कर अलग से रिंग बांध बनाया जा रहा है।
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इससे बाराबंकी के तीन गांव बांध व घाघरा के बीच हो गए हैं। नदी के बढ़ते ही पारा, परसावल व बेहटा तीनों गांवों को घाघरा निगल जाएगी। ऐसे में यहां के लोग पहले से ही अपना सामान लेकर बांध के दूसरे छोर पर पहुंच गए हैं।
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