गोंडा। जिला प्रशासन अब कारागार में बंद बंदियों की सेहत संवारने के साथ ही उन्हें रोजगार कार्यक्रमों का प्रशिक्षण भी दिलाएगा। इसके लिए विशेषज्ञ जेल में योगा के साथ ही रोजगार प्रशिक्षण की कक्षाएं संचालित करेंगे। प्रशासन की इस योजना का लाभ जेल में बंद 1089 बंदियों को चरणवार प्रशिक्षण के बतौर मिलेगा। जिलाधिकारी ने इस संबंध में जेल प्रशासन को एक प्रस्ताव तैयार कर देने को कहा है।
योजना के तहत बंदियों को आजीविका मिशन योजना से जोड़कर सीधे रोजगार मुहैय्या कराने का कार्य होगा। सोमवार को जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने यह जानकारी दी।
वह जिला जज मयंक जैन, पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्र सहित अन्य अफसरों के साथ जिला कारागार का निरीक्षण करने पहुंचे थे। डीएम ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए कि जेल में निरुद्ध कैदियों को आत्म निर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए एनआरएलएम से जोड़े तथा कौशल विकास मिशन के सहयोग से अन्य रोजगार परक प्रशिक्षण दिलाएं।
डीएम ने कैदियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए योग की कक्षाएं भी चलवाने के निर्देश दिए। डीएम ने जेल परिसर में विधिवत साफ-सफाई सुनिश्चित कराने के साथ ही जेल मैनुअल का शत प्रतिशत अनुपालन भी सुनिश्चित कराने को कहा।
जेल अधीक्षक ने बताया कि जिला जेल में कुल 1029 कैदी तथा अस्थाई जेल में 60 कैदी निरुद्ध हैं। इसमें जिला जेल में दोष सिद्ध 214, विचाराधीन 791, एनएसए के तहत 06 तथा अस्पताल में 18 कैदी हैं। इसी प्रकार अस्थाई जेल में 02 दोष सिद्ध तथा 58 विचाराधीन कैदी हैं।
सोमवार को जनपद न्यायाधीश मयंक जैन, डीएम मार्कंडेय शाही व पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने जिला कारागार का संयुक्त औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण पर पहुंचे अधिकारियों ने प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी बैरकों में सघन तलाशी अभियान चलाएं और एक-एक बैरक की तलाशी लें।
निरीक्षण के दौरान जिला जज व डीएम ने कैदियों से बात की तथा उन्हें जेल में दी जा रही सुविधाओं एवं उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। जिला जज तथा जिलाधिकारी ने स्वयं विभिन्न बैरकों, अस्पताल, भोजनालय, भंडार कक्ष, पुस्तकालय आदि का निरीक्षण किया।