आरटीई के तहत गरीब बच्चों को निजी विद्यालयों की 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिलाने की कवायद चल रही है। विभागीय जानकारोें ने बताया कि जिले में 712 निजी विद्यालय आरटीई के तहत पंजीकृत हैं। सरकार की ओर से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत इनकी 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को पहली या प्री प्राइमरी कक्षा में प्रवेश दिलाने का प्रावधान है। इस अधिनियम के तहत गरीब बच्चे निशुल्क प्रवेश पाने के साथ ही सरकार के अनुदान के हकदार होते हैं। काॅपी-किताब से लेकर यूनीफाॅर्म व फीस की व्यवस्था सरकारी स्तर पर की जाती है।
बावजूद इसके जिले में शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 1330 बच्चों का आरटीई के तहत चयन किया गया है। इसमें से 1082 बच्चों को प्रवेश दिलाया जा चुका है। जबकि 102 बच्चों ने निजी विद्यालयों की संचालकों की खराब रवैये के चलते प्रवेश नहीं लिया है। चौथी लाॅटरी में 155 बच्चों का चयन किया गया है।
अभिभावकों का आरोप है कि अधिकारियों के लचर रवैये से निजी स्कूल संचालक एक ही कक्षा की अलग-अलग फीस तय कर मनमाना वसूल रहे हैं। संचालक निर्धारित दुकानों से पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाते हैं।
बीएसए प्रेमचंद यादव का कहना है कि चौथी लाॅटरी के तहत आरटीई के बच्चों को खंड शिक्षाधिकारियों की मदद से निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया चल रही है। जबकि तीन चरणों में अबतक 1082 बच्चों को प्रवेश दिलाया जा चुका है। जल्द ही 155 चयनित बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश की प्राक्रिया पूरी कर ली जाएगी।