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गौरैया संरक्षण के लिए 1000 प्राकृतिक वास बनेंगे

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हमारे पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के साथ ही उसकी हर अच्छी-बुरी खबर को हम तक सबसे पहले पहुंचाने वाली गौरैयों की घटती संख्या पर काबू पाने के लिए प्रदेश सरकार ने स्कूलों के मार्फत एक ऐसी योजना शुरू करने का फैसला लिया है। जिससे न सिर्फ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे गौरैया की विशेषताओं से रूबरू हों सकें, बल्कि उनके संरक्षण में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित कर सकें।
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शुरुआती दौर में गौरैया के संरक्षण के लिए शुरू की गई इस योजना में सूबे के सभी जिलों में नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस), एनआईई (न्यूज पेपर इन एजूकेशन), एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ सोशल वेलफेयर) व सीईए (सेंटर फॉर इन्वायरमेंटल एजूकेशन) के जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर में से 10-10 ट्रेनर/स्कूली बच्चों को चिन्हित किया जाएगा।

यह बच्चे अपने स्तर से 10-10 विद्यालयों को चिन्हित करेंगे। इसके बाद प्रत्येक स्कूल में 15 गुणा 15 बाई 25 सेमी के एक हजार लकड़ीनुमा बॉक्स बनाकर 10-10 लकड़ी के बॉक्स लगाए जाएंगे, ताकि विलुप्त हो रही गौरैया इसमें प्रवास कर अपने कुनबे को बढ़ा सके।
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वहीं, विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च को होने वाले सेमिनार में बच्चों को गौरैया संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा।

गौरैया संरक्षण के लिए किसी भी जिले को न तो कोई बजट दिया गया है और न ही आगे चलकर कोई बजट दिए जाने का प्राविधान है। इसलिए गौरैया के लिए घर बनाने का काम वन विभाग को स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यालयों के प्रबंधकों व एनजीओ के साथ मिलकर करना होगा, जिसकी कवायद जिले में शुरू कर दी गई है।

जिले से रवि चिल्ड्रेन एकेडमी, फातिमा स्कूल, सीएमएस गर्ल्स इंटर कॉलेज, रघुकुल विद्यापीठ, सेंट जेवियर्स स्कूल, प्राथमिक विद्यालय धौरहरा करनैलगंज व स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज गोंडा का चयन गौरैया संरक्षण के लिए चलने वाले अभियान के क्रम में किया गया है।

गौरैया संरक्षण के लिए बनने वाले लकड़ीनुमा बॉक्स की लंबाई व चौड़ाई 15-15 सेंटीमीटर होगी, जबकि ऊंचाई 25 सेंटीमीटर। इस बक्से के निचले तल से 16 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर एक होल (छेद) होगा, जिसकी गोलाई 32 मिलीमीटर होगी, ताकि इस छेद से कोई दूसरा पक्षी उसमें प्रवेश न कर सके।

बक्से के निचले भाग पर 5-6 छोटे-छोटे (2-2 मिलीमीटर) के छेद होंगे, ताकि इन छेदों से जो भी तरल पदार्थ हो, वह आसानी से बाहर निकल जाए। गौरेया के लिए बनने वाले इन लकड़ीनुमा बॉक्स को जमीन से दो मीटर की ऊंचाई पर लगाया जाएगा।

प्रभागीय वनाधिकारी गोंडा डॉ. टी रंगाराजू ने कहा कि गौरैया संरक्षण के लिए जिले में उन्हें 1000 प्राकृतिक वास (लकड़ीनुमा घर) बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसका काम हर हाल में वह 7 मार्च से पहले पूरा कर लेंगे।

गोंडा वन प्रभाग में कुल 9 वन रेंज है, जिनके रेंजरों को अपने-अपने इलाकों में गौरैया के रहने के लिए लकड़ीनुमा बॉक्स बनाने का निर्देश दिया जा चुका है।

शासनस्तर पर 6 विद्यालयों का चयन इस योजना में किया गया है। जहां के बच्चे जिले भर से 100 विद्यालयों का चयन करेंगे, जिसमें 10-10 लकड़ीनुमा बॉक्स लगाकर गौरैया को बसाया जाएगा।
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