अक्षय तृतीया पर किए काम का नाश नहीं होता। इसी मंशा से आस्थावानों ने अचल संपत्तियों की खरीद की। सबसे ज्यादा खरीददारी स्वर्ण आभूषणों की की गई। मिश्रबाजार, चीतनाथ, सनबाजार, महुुआबाग में सराफा की दुकानों पर सोमवार रात तक खरीददारों की भीड़ लगी रही। सराफा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने बताया कि जिले में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के आभूषण की खरीद हुई।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व है। पुराणों में उल्लेख है कि इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ। नर नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था। भगवान पशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ। मान्यता के मुताबिक लोगों ने मां गौरी एवं शिव परिवार की पूजा की और सौभाग्य की कामना की। गंगा घाटों पर स्नान और दान करने वालों की सुबह से ही भीड़ लगी रही। लोगों ने गंगा स्नान के बाद सत्तू, गुड़, जल से भरे घड़े और ककड़ी-तरबूज आदि का दान किया। लोगों ने नए भवन के लिए भूमि पूजन किया। परंतु सबसे ज्यादा मांग सोने की खरीद की रही।
बेशकीमती आभूषण एवं सामान शाश्वत समृद्घि के प्रतीक के रुप में सबसे ज्यादा मार स्वर्ण की खरीद की रही। माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी समाप्त नहीं होता है। लिहाजा सोने के आभूषणों की दूकानों पर जबरदस्त भीड़ रही। सराफा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने बताया कि सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कम वजन के गहनों की मांग रही। राधेकृष्ण ज्वेलर्स के दिलीप अग्रहरि ने बताया कि नेकलेस, रिंग की मांग ज्यादा रही। उन्होंने बताया कि उनके यहां सोना स्टैंर्ड भाव से 2000 रूपये प्रति दस ग्राम जेवर पर छूट तथा ब्रांडेड डायमंड ज्वैलरी पर 15 प्रतिशत की छूट रही। सिद्धि विनायक ज्वैलर्स के राजेश अग्रहरी ने बताया कि उनके यहां सोने की न्यूनतम दर का ग्राहकों को लाभ दिया गया। हीरे के मूल्य पर 20 प्रतिशत की छूट दी गई। अबकी हीरे के आभूषणों की भी मांग रही।