धरना-प्रदर्शन करते मनरेगा मजदूर ।
ग्राम प्रधान सिधउत और ब्लाक कर्मचारियों के बीच का प्रकरण अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार की शाम ब्लाक कर्मचारियों ने ग्राम प्रधान के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी तो गुरुवार को ग्राम प्रधान ने अपने नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों के साथ ब्लाक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ भुगतान की मांग की। ब्लाक प्रमुख के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ।
कई दिनों से ग्राम प्रधान और ब्लाक कर्मचारियों के बीच भुगतान और जांच के नाम पर किचकिच हो रही थी। बुधवार को खंड विकास अधिकारी धनंजय सिंह के नेतृत्व में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, रोजगार सेवक और सफाई कर्मियों ने एक साथ थाना पहुंचकर ग्राम प्रधान के खिलाफ अभद्रता, गाली-गलौज और सरकारी काम में अवरोध पैदा करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा पंजीकृत करने की मांग की थी।
दूसरी तरफ आज ग्राम प्रधान सिधउत दिनेश सिंह यादव ने अपने ग्राम पंचायत के मनरेगा मजदूरों के साथ सुबह 10 बजे ब्लाक कार्यालय पहुंचकर फावड़ा और कुदाल के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया कि आठ लाख रुपये का मनरेगा मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। इसी प्रकार इंटर लाकिंग का कार्य का भुगतान बाकी है। कर्मचारियों की ओर से लंबा कमीशन मांगे जाने के कारण इसका भुगतान अटका हुआ है।
मजदूर अपने किए कार्य का भुगतान मांग रहे हैं। उधर रोजगार सेवक धनंजय कुमार गुप्ता ने ग्राम प्रधान के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि एक पोखरे की खुदाई हुई है, जिसका भुगतान दो लाख 66 हजार रुपये कर दिया गया है। 2016-17 के जॉब कार्ड की सूची मांगी गई, जो अब तक ग्राम प्रधान ने उपलब्ध नहीं कराई है। इसके कारण कोई कार्य नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी धनंजय सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि सभी आरोप बेबुनियाद है।
ग्राम प्रधान के आतंक से कोई कर्मचारी गांव में जाना नहीं चाहता है। खंड विकास अधिकारी की अनुपस्थिति में ब्लाक प्रमुख श्याम नारायण द्वारा सभी कार्यों का भुगतान एवं स्थलीय जांच का आश्वासन दिया गया। इस पर चार घंटे बाद धरना समाप्त हुआ।