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नहरें बेपानी, अफसर कर रहे मनमानी

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गाजीपुर। जिले में नहरों का भले ही जाल बिछा हो, लेकिन विभागीय उपेक्षा के कारण नहरें बेपानी हो गई हैं। किसान खेतों की सिंचाई के लिए तरस रहे हैं। वर्तमान में सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त है। कहीं नहर जर्जर है तो कहीं नहर का पानी उफन रहा है? कुछ नहरों में आज तक पानी ही नहीं छोड़ा गया है तो कुछ को पाट दिया गया है। कहीं टेल तक पानी पहुंचने की समस्या सामने आ रही है तो कहीं नहर का पानी कहां गिरे इसकी समस्या खड़ी है ? कुछ नहरें साफ-सफाई न होने से झाड़-झंखाड़ से पटी हुई हैं तो कुछ अतिक्रमण की शिकार हैं। जबकि विभाग शिल्ट सफाई के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल हर साल कर रहा है।
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दलपतपुर रजवाहा: देवकली पंप कैनाल से तीन दशक पहले चालू की गई दलपतपुर राजवाहा किसानों के लिए आज भी अभिशाप साबित हो रही है। नहर की सिल्ट सफाई के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग सालों से हो रहा है। बिरनो राजवहा से निकलकर 24 किलो मीटर लंबी नहर गडार ड्रेन में जाकर गिरती है। यह नहर 234 हेक्टयर खेत की सिंचाई करती है। राजस्व की वसूली सरकार की तरफ से बंद कर दी गई है, लेकिन इसका लाभ यहां के किसानों को नहीं मिल रहा है। इसमें दलपतपुर, असावर, भठवा, सरेजा, नेवादा, कमसडी, हरदासपुर, दुबिहां, गोविंदपुर, गडार, पाहुपुर आदि गांव हैं। इन गावों के पास की नहर की सफाई न होने से नहर पूरी तरह से समतल हो गई है। टेल तक नहर का पानी नहीं जा पाता है।
रामदासपुर राजवाहा : यह दलपतपुर नहर से निकली है। वर्तमान में नहर का अस्तित्व खत्म हो गया है और जगह -जगह पाट दिया गया है। इससे नहर का पानी किसानों को उपलब्ध नहीं होता। इस राजवहा में आज तक पानी नहीं देखा गया। नहर को दुबिहाँ गाव के पास तक खोद कर छोड दिया गया है। जबकि इस नहर से धान तथा गेहूँ तथा सब्जियों की सिंचाई करने वाले गांवों के सामने पानी का संकठ बना रहता है। किसानों ने इसके लिए कई बार संबंधित उच्चाधिकारियों को इससे अवगत भी कराया है, लेकिन बिना आश्वासन के किसानों को कुछ भी नहीं मिला। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र प्रसाद का कहना है कि नहर को जल्द ठीक कराकर पानी छोड़ा जाएगा।
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जमानिया चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल: यह पंप कैनाल किसानों के लिए वरदान है। लेकिन नहर की कई माइनरें जर्जर होने से पानी अक्सर ओवर फ्लो करता है। इससे किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है। बड़ेसर ग्राम सभा के चक्काबांध गांव में स्थित इस पंप कैनाल को वर्ष 1991 में चौधरी चरण सिंह द्वारा निर्माण कराया गया था। जिससे क्षेत्र में सिंचाई का कार्य किया जाता है और इस पंप कैनाल से करीब 60 प्रतिशत की कृषि योग्य भूमि सिंचाई होती है। इस नहर की कुल लंबाई लगभग 400 किमी है, जिसमें पोषक नहर 4.86 किमी, मुख्य नहर 37.2 किमी है। इसके साथ ही पंप कैनाल से दवैथा रहवाहा 14.60 किमी, दिलदारनगर रजवाहा 24 किमी, ताडीघाट रजवाहा 27 किमी, नौली रजवाहा 14 किमी है। इसके आलावा पंप कैनाल से कई माइनरें निकली है। पंप कैनाल में कुल 92 टेल है। जहां तक पानी पहुंचाया जाता है। क्षेत्र में कुल लगभग 41 हजार 7 सौ 25 हेक्टर कृषि योग्य भूमि है। जिसमें चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल लगभग 27 हजार 30 हेक्टर की सिंचाई होती है। यह कृषि क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत है। 40 प्रतिशत भूभाग की सिंचाई के लिए अभी तक इंतजाम नहीं हो सका है। यही वजह है कि सूखे की आशंका हमेशा इस क्षेत्र में बनी रहती है। नहर की डिजाइन इस प्रकार से की गई है कि कम से कम 60 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि की सिंचाई हो सके। खरीफ की फसल में इस नहर के जरिए लगभग 28 हजार हेक्टर भूमि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। जबकि पंप कैनाल की क्षमता रवि की फसल में घट कर 24 हजार हेक्टर हो जाती है। इस पंप कैनाल में आठ पंप लगे है।
दिलदारनगर : कुसी-जबुरना माइनर: इस माइनर से जुड़े किसानों को हमेशा फसल की सिंचाई को लेकर समस्याओं से जूझना पड़ता है। इस माइनर में टेल तक पानी पहुंचने में समस्याएं तो नहीं है, लेकिन माइनर के अंत में जबुरना गांव के पास पानी निकासी के लिए कोई रास्ता न होने के कारण माइनर का पानी किसानों के खेतों में फैल जाता है। जिससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं। देखा जाए तो बरुई, दरौली, दिलदारनगर, उसिया राजवाहा से निकली कुसी- जबुरना माइनर की लंबाई 3.6 किलडोमीटर की है। इस नहर से 300 हेक्टेयर की सिंचाई होती है। जिसमें सप्ताह में तीन दिन इस माइनर में पानी आता है।
सुहवल ताड़ीघाट रजवाहा : इलाके की प्रमुख नहर में शामिल ताड़ीघाट रजवाहा जमानियां स्थित चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से क्षेत्र की दर्जनों गांव से होते हुए उधरनपुर गांव तक जाकर ड्रेन में गिरती है। इसकी कुल लंबाई करीब 27 किमी है। इससे कुल सात विभिन्न माइनरें भी जुड़ी हैं। ताड़ीघाट रजवाहा से दर्जनों गांव की करीब 4000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। पूर्व में इस रजवाहा से विभाग को करीब 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष राजस्व के रूप में प्राप्त होता था लेकिन दशकों पहले पूर्ववर्ती सरकार ने सिंचाई को पूरी तरह से मुफ्त सिंचाई कर गई।
काफी वर्ष पहले सिंचाई का लगने वाला राजस्व पूरी तरह से मुफ्त कर दिया गया है। इसके विभाग को प्रतिवर्ष मिलने वाला राजस्व के रूप में 12 लाख अब नहीं मिल रहा है। विभाग किसानों के खेतों में समय से पानी पहुंचाने को लेकर प्रतिबद्ध है। समय से आवश्यकता अनुसार नहरों, माइनरों में पानी छोड़ा जाता है ताकि किसान इसका लाभ ले सकें। सिंचाई में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए नहरों, माइनरों की साफ-सफाई कराई जाती है। पेट्रोलिंग कर्मचारियों द्वारा की जाती है। - अजय श्रीवास्तव, ताड़ीघाट रजवाहा के सहायक अभियंता
दिलदारनगर के कुसी-जबुरना माइनर की लंबाई 3.6 है, जो कुसी से निकलकर जबुरना तक जाती है। जबुरना गांव के पानी टंकी के पास माइनर का अंत हो जाता है। पानी की निकासी की व्यवस्था न होने से माइनर का पानी किसानों के खेतों में फैलने लगता है। अगर थोड़ा-थोड़ा जमीन किसान उपलब्ध करा दें, तो इस माइनर के पानी की निकासी के लिए जबुरना नाला में गिराया जा सकता है। कुछ किसान सहयोग के लिए आगे आए लेकिन कुछ किसान सहयोग करने में पीछे हट रहे हैं। - शशिकांत, जेई
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