ग्रामीणों के संकल्प से मगई नदी पर बनाए जा रहे पुल के दो पाये बनकर तैयार हो गए हैं। शासन-प्रशासन से पुल की मांग पूरी न होते देख ग्रामीणों ने जनसहयोग से पुल बनाने का निर्णय लिया था।
सदियों से मुश्किलें झेल रहे नोनहरा क्षेत्र के क्यामपुर ग्राम पंचायत के लोगों ने मगई नदी पर पुल बनाने की मांग कई बार की। बात नहीं बनी तो जनसहयोग से पक्का पुल बनाने का निर्णय लिया। सबसे पहले सेना से रिटायर्ड रविंद्र यादव ने 10 लाख की सहयोग राशि प्रदान की। इसके बाद क्षेत्र के अन्य लोग भी आगे आए और लगभग एक वर्ष पहले 24 फरवरी 2024 को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव ने भूमि पूजन कर पुल का शिलान्यास किया। इस मौके पर मुहम्मदाबाद की पूर्व ब्लाॅक प्रमुख चंदा यादव सहित कई महिलाएं भी उपस्थित थीं। उसके बाद पुल बनना शुरू हुआ और उसका एक हिस्सा बन कर तैयार हो गया है। इसमें दो पाया और उसके ऊपर का स्लैब पड़ गया है। ग्रामीण रमाकांत यादव एवं कालिका यादव ने बताया कि पुल के निर्माण में अब तक लगभग 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अभी पुल के दो हिस्से बाकी हैं, जिन पर लगभग 50 से 55 लाख रुपये का खर्च आएगा। पुल ग्रामीणों के लिए कितना जरूरी है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्यामपुर ग्राम पंचायत का ही हिस्सा चकिया गांव के लोगों को बरसात के मौसम में कोटे से राशन लेने के लिए 15 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। मगई नदी में बाढ़ की स्थिति में लोगों को नोनहरा थाने जाने के लिए 50 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। शुरुआत में कासिमाबाद के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख मनोज गुप्ता ने ब्लाॅक निधि से एक पाया बनवाया लेकिन निर्माण को लेकर विवाद हो जाने के कारण काम रुक गया। इसके बाद ग्रामीणों ने जनसहयोग से पुल बनाने का निर्णय लिया। पुल बन जाने से क्यामपुर, बासुदेवपुर, कादीपुर, उसरी, पठनपुरा, भोपतपुर, चकिया, परसुपुर, डिहवा, बहादीपुर, बलुआ, अरजानीपुर, सवना, अरार, मोलनापुर सहित तीन दर्जन से अधिक गांव के लोगों को सहूलियत होगी।