सामूहिक विवाह के लिए अपात्र घोषित युवती खुद को सही साबित करने के लिए डीएम कार्यालय पहुंच गई। वह अपनी मां, होने दूल्हे और दिव्यांग पिता के साथ पहुंची और बोली शादी की पूरी तैयारी हो चुकी है लेकिन ग्राम सचिव ने उसे कागज पर विवाहित दिखा दिया है। जबकि उसकी शादी नहीं हुई है। हालांकि डीएम ने जांच कराने के बाद योजना का लाभ दिलाने की बात कहकर उन्हें वापस भेज दिया।
रेवतीपुर ब्लॉक क्षेत्र के हसनपुरा गांव के भीम राम दिव्यांग हैं। उन्होंने अपनी छोटी बेटी की शादी बड़ी बेटी के देवर से तय की। गरीबी के कारण यह शादी उन्होंने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत करने के लिए आवेदन किया। आरोप है कि तीन दिन पहले सत्यापन के लिए ग्राम सेवक के घर गए तो उन्होंने बताया कि ग्राम सचिव ने उनकी बेटी कुसुम को कागज में विवाहित दिखाया है। इससे वह सोमवार को शादी करने से वंचित हो गई। निराश पिता बेटी और होने वाले दामाद को लेकर डीएम आर्यका अखौरी के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई। उनका कहना था कि ग्राम सचिव सत्यापन के लिए उनके घर गए बिना रिपोर्ट लगा दी। उन्होंने बताया कि डीएम ने आश्वासन दिया कि जांच कराई जाएगी। सही मिलने पर अगले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में शादी करा दी जाएगी। सीडीओ संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि जांच के बाद पात्र पाए जाने पर अगली बार होने वाली शादी में युवती को शामिल किया जाएगा।