मौसम का रुख बदलने के बाद रविवार की रात और सोमवार की सुबह हुई मामूली बूंदाबांदी के चलते ठंड में इजाफा हुआ है। सोमवार को पूरे दिन बदली छायी रही। रविवार तक दिन में तल्ख धूप होने के कारण लोगों ने गरम कपड़े रख दिए थे। यह माना जा रहा था कि अब मौसम साफ रहेगा लेकिन रविवार की रात से ठंड लौटने पर लोगों ने फिर
गरम कपड़े निकाल लिए। किसानों का मानना है कि मौसम में नमी का लाभ गेहूं की फसल को मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन के चलते इस बार ठंड के मौसम में अपेक्षित ठंडी नहीं पड़ी। इसके चलते न सिर्फ मौसम के रुख में
भी लगातार परिवर्तन के साथ ही तापमान में उतार चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह से न सिर्फ लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं बल्कि खेती पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस बार ठंडी अधिक न पड़ने
और नमी की कमी के कारण गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। अधिकतर स्थानों पर गेहूं की फसल काफी खराब स्थिति में नजर आ रही है। गेहूं की पौधों का विकास रुक गया है। वहीं कुछ स्थानों पर गेहूं के छोटे पौधों में बालियां
निकल आई हैं। कृषि वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित हैं और इसकी वजह मौसम परिवर्तन बता रहे हैं। बसंत पंचमी बीतने के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अब मौसम साफ होगा लेकिन शनिवार की शाम से मौसम ने करवट ली और रात में बूंदाबांदी हुई। सोमवार को सुबह से पूरे दिन बदली छायी रही और रह-रह कर मामूली बूंदाबांदी होती रही जिससे ठंड में इजाफा हुआ है। पीजी कॉलेज के मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार को भी बदली छाए रहने की संभावना है। हालांकि मौसम के रुख में परिवर्तन को लेकर किसान उत्साहित हैं। उनका मानना है कि मौसम में नमी बढ़ने का लाभ गेहूं की फसल को मिलेगा।