गुरुद्वारा से शुरु होकर नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शोभायात्रा वापस गुरुद्वारा पहुंची। कीर्तन में सबसे आगे निशान साहब शोभायात्रा की अगुवाई कर रहे थे।
उसके पीछे बाहर से मिलेट्री बैंड अपने धुनों की छटा बिखेर रहे थे। उनके पीछे चल रहे स्कूली बच्चे हाथों में लिखी तख्तियों के जरिए लोगों को अच्छे संदेश देते चल रहे थे।
शोभायात्रा में मुख्य आकर्षण का केंद्र बिजनौर से आई गतका पार्टी थी। युवक विभिन्न सांस्कृतिक संगीतों की धुन पर खतरनाक और अनूठे करतब दिखा रहे थे।
दूसरी तरफ सिख समुदाय के लोग जत्था बनाकर शबद-कीर्तन द्वारा शोभायात्रा के माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। पूरा नगर सतनाम वाहे गुरु, बोले सो निहाल सतश्री अकाल से गूंज उठा।
शोभायात्रा में गुरुग्रंथ साहब की सवारी को बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिसकी अगुवाई विशेष वेषभूषा धारण किए पंच प्यारे बोले सो निहाल का जयकारा लगाकर कर रहे थे।
आयोजन में त्रिलोचन सिंह, नरजीत सिंह, जसवीर सिंह, हरजीत सिंह, अमरजीत सिंह, गुरुचरण सिंह, सतनाम सिंह, पिंटू सिंह, देवेंद्र कौर, सतनाम कौर, प्रिंस, कुलदीप सिंह, गुरुप्रीत सिंह, गोविंद सिंह, इंद्रपाल सिंह आदि शामिल थे।
अंत में दशमेश सेवा समिति के अध्यक्ष सुरजीत सिंह बग्गा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। रात में गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन हुआ।