बारा। जिले से एक बार फिर खाद की तस्करी तेज हो गई है। सड़क मार्ग से ऑटो, ई - रिक्शा, पिकअप के जरिए प्रतिदिन सैकड़ों बोरी यूरिया बिहार भेजी जा रही है। रविवार को भी ई - रिक्शा में ऐसा देखने को मिला। यह सिलसिला करीब 10 दिनों से जारी है। सब कुछ जानते हुए भी प्रशासनिक अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
गेहूं की सिंचाई के बाद यूरिया की जरूरत पड़ती है। रबी सीजन में भदौरा ब्लॉक के सहकारी समिति बारा - भतौरा, गहमर, मनिया, देवल पर 600 टन यूरिया की खपत होती है, अब तक करीब 313 टन यूरिया वितरित की जा चुकी है। इसके बावजूद किल्ल्त दूर नहीं हो रही है। क्षेत्र में यूरिया की किल्ल्त बनी हुई है। सहकारी समितियों पर खाद नहीं है। किसान इसके लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र के कुछ दुकानों पर अधिक मूल्य लेकर खाद की बिक्री की जा रही है। जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ रही है। सरकार ने यूरिया की कीमत 267 रुपये निर्धारित किया है। दुकानों पर कालाबाजारी के कारण यह 350 से 400 रुपये तक में बिक रही है। बिहार ले जाकर इसकी कीमत आठ सौ से एक हजार रुपये तक वसूल की जाती है। इसकी वजह से क्षेत्र में यूरिया का संकट खत्म नहीं हो रहा है। किसान यूरिया के लिए सहकारी समितियों पर लाइन लगाने के लिए विवश हैं। वहीं विभाग उनकी मांग की पूर्ति नहीं कर पा रहा है।
किसी भी हालत में खाद की तस्करी नहीं होने दी जाएगी। अगर खाद की तस्करी हो रही है तो कृषि विभाग के अधिकारी से कहकर कार्रवाई की जाएगी। - राजेश प्रसाद चौरसिया, उपजिलाधिकारी सेवराई