स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें ट्रॉमा सेंटर वाराणसी ले जाया जा रहा था कि रास्ते में ही रात लगभग करीब 10:30 बजे उनकी मौत हो गई। वहीं, पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चली गई। इधर मौत की सूचना मिलते ही स्वजनों में कोहराम मच गया।
पत्नी तारा देवी व अन्य स्वजनों का रो-रो कर बुरा हाल रहा। मृतक शंकर के चार बेटे संतोष, सुभाष, संजय और मंजय हैं। जिनमें दो बेटे रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर हैं। बेटों का कहना है कि उनके पिता शंकर यादव की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह किसी को भी भला बुरा बोल देते थे।