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अनलॉक होने के बाद प्रवासियों ने गैर प्रांतों के तरफ किया रूख

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गाजीपुर। लॉकडाउन शुरू होने के बाद एक लाख 25 की संख्या में कामगार मजदूर महानगरों व दूसरों प्रांतों से जनपद में लौटे थे। अनलॉक होने और हालत सुधरने के बाद करीब 20 हजार प्रवासी वापस लौट चुके हैं। इसमें ज्यादातर तकनीकी रूप से दक्ष लोग शामिल हैं, जिन्हें उनकी दक्षता के मुताबिक जनपद में रोजगार नहीं मिल सका। ऐसे में इन कामगारों को वापस बुलाने के लिए गैर प्रांतों में स्थापित कंपनियों की ओर से उन्हें अच्छी पगार देने के साथ ही किराए तक देने की पेशकश की जा रही है। लॉकडाउन दौरान मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, हैदाराबाद, अहमदाबाद, गुजारात जैसे जगहों पर काम करने वाले एक लाख 25 हजार प्रवासी आए। ऐसे में इनके सामने रोजगार की समस्या पैदा हो गई। ऐसी स्थिति में आठ हजार 509 प्रवासियों को मनरेगा के तहत कार्य दिया गया। जबकि तकनीकी रूप से दक्ष लोगों को रोजगार नहीं मिला। अब तक करीब 20 हजार के आस-पास लोग वापस काम पर लौट चुके हैं। औड़िहार: करीब 300 से ज्यादा प्रवासी मजदूर दिल्ली, अहमदाबाद, पंजाब, मुंबई, पुणे, हरियाणा समेत विभिन्न महानगरों को लौट चुके है। हालांकि घर लौटने वाले प्रवासियों की संख्या के मुकाबले अभी सीमित संख्या में ही मजदूर पुन: अपने मालिकों अथवा फैक्ट्री संचालकों के बुलावे पर महानगर जाने को तैयार हैं। नेवादा गांव के राधेश्याम एवं लल्लन को दिल्ली से काम के लिए बुलावा आ गया है। उनके यात्रा खर्च वहन की भी पेशकश की गई है। गाजियाबाद के प्लास्टिक के दाने के कारखाने में काम करने वाले रमेश व राम भजन चौहान को उनके पूर्व वेतनमान पर काम देने की बात कह कर बुलाया गया है महरूम पुर के ग्राम प्रधान राजकुमार बताते हैं कि उनके गांव आए सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत काम दे दिया गया है। शादी-भादी के ग्राम प्रधान धर्मेंद्र सिंह ने बताया कोरोना के भय के चलते कम ही प्रवासी गैर प्रात जा रहे हैं। जमानिया: प्रवासी मजदूर ट्रेन, बस या फिर पैदल अपने राज्यों में वापस लौटे। गांव में रोजगार के संकट के कारण परिवार का जीविकोपार्जन मुश्किल हो गया और प्रवासी मजदूर वापस अपने काम पर लौट रहे हैं। विकास खंड के 83 ग्राम सभा में करीब 19 राज्यों से दो हजार 240 प्रवासी मजदूर आए हैं। इसमें कुछ प्रवासियों को रोजगार मुहैया हुआ, वह भी कौशल के विपरीत। घर आने के बाद भी कामगार मजदूर अपने मालिकों के संपर्क में बराबर बने हुए हैं, जरूरत के मुताबिक मालिक के बुलाहट पर ये मजदूर अब लौट रहे हैं। खंड विकास अधिकारी हरिनारायण ने बताया कि गैर प्रांतों को लौट रहे प्रवासियों की ग्राम पंचायत स्तर पर सूची तैयार की जा रही है।
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