सदाकत के पिता शमशाद खान दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। सदाकत इलाहबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का नेता भी रह चुका है। इस संबंध में गहमर कोतवाल पवन कुमार उपाध्याय ने बताया कि सदाकत की गिरफ्तारी के संबंध में फिलहाल कोतवाली में कोई जानकारी नहीं आई है। जानकारी आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक सवाल के जवाब में यूपी पुलिस एसटीएफ चीफ ने आगे कहा, “दरअसल अभी तक इस कांड में मुख्तार अंसारी की कोई भूमिका नहीं मिली है। आगे की जांच में अगर वो कहीं आता है तो इस पर फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है। मुख्य रूप से अब तक उमेश पाल हत्याकांड कांड में अहमदाबाद जेल में बंद माफिया अतीक अहमद और बरेली सेंट्रल जेल में बंद उसके भाई अशरफ का ही हाथ सामने आ रहा है। इस मामले में अभी बात अगर मुख्य गिरफ्तारी की करें तो हाई कोर्ट में वकालत करने वाला सदाकत ही पहला आरोपी है।
भले ही इस डबल मर्डर की प्लानिंग क्यों न जेल में बनी हो। मगर उसके बाद उमेश पाल को कत्ल करने के अंतिम रूप दिए जाने वाली बैठकों में से अधिकांश बैठकें इसी सदाकत के प्रयागराज स्थित मुस्लिम हॉस्टल वाले कमरे में हुई थीं। इस बात को गिरफ्तारी के बाद खुद सदाकत ने ही कबूला है।
गाजीपुर में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सोमवार को उमेश पाल की हत्या के विरोध में शोकसभा का आयोजन कर मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक तहसीलदार को सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष गोरखनाथ सिंह ने कहा कि अधिवक्ता श्रीकृष्ण कुमार पाल उर्फ उमेश पाल की दिन दहाड़े गोली मारकर नृशंस हत्या उनके घर पर कर दी गई।
इस हत्याकांड में उनके साथ-साथ उनके सुरक्षा कर्मी की भी हत्या कर दी गई। इस घटना से न केवल पुलिस एवं प्रशासन की लापरवाही दृष्टिगत होती है, बल्कि अधिवक्ताओं और आम जन के बीच शासन की छवि भी धूमिल हो रही है। उन्होंने मांग किया कि प्रदेश में जघन्य हत्या के शिकार अधिवक्ताओं के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी एवं उनके परिवार को कम से कम 20 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।