सेना के दो सर्वोच्च सम्मान का साक्षी जखनियां विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस माटी को साहसी और वीरता के प्रतीक परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद और महावीर चक्र विजेता रामउग्रह पांडेेय के साथ किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती जैसे लोगों की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसानों के हित में राष्ट्र और समाज को नई दिशा देने का कार्य किया था। इस बार के विधानसभा चुनाव में दो नए और एक पुराने दावेदारों के बीच घमासान होना तय है।
वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य वीरता और साहस का परिचय देते हुए वीरगति को प्राप्त शहीद अब्दुल हमीद को जहां सेना के सर्वोच्च पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, वहीं वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध में शहीद रामउग्रह पांडेय को सेना के दूसरे सर्वोच्च सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किए गए। करीब 650 वर्षों से स्थापित सिद्धपीठ हथियाराम मठ और करीब 400 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ मठ आध्यात्म जगत में एक स्तंभ के रूप में विद्यमान नजर आता हैं। इसी क्षेत्र में जन्मे किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती जीवन किसान हित के लिए समर्पित कर दिए।
शादियाबाद स्थित मलिक मरदान साहब की मजार, बहरियाबाद में महाभारतकालीन देवकी की संतान के एक अंश के रुप में स्थापित टड़वा भवानी मंदिर , मौनी बाबा आश्रम के साथ ही जलालाबाद कोट जैसी तमाम ऐतिहासिक, धार्मिक और सामाजिक धरोहर इसी विधान सभा क्षेत्र में हैं। ऐसे पौराणिक और सेना के दो सर्वोच्च सम्मान का गौरव हासिल करने वाले क्षेत्र में इस बार भाजपा-भासपा, सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के प्रत्याशियों की ओर से जो आजमाइश शुरू कर दी गई है। अपनी तमाम ऐतिहासिकता सामाजिक और धार्मिक महत्व रखने के बावजूद आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।