विशेष न्यायधीश ईसी एक्ट क्षीतिज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 11 वर्ष पूर्व करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र में एक बालक के अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया।
करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के भरौली आला गांव निवासी घनश्याम सिंह की भाभी का दशकर्म संस्कार 1 अगस्त 2004 को था। उस कार्यक्रम में परिवार के लोग व्यस्त थे। उनका पौत्र शिबू उर्फ शशांक शेखर सिंह (12 वर्ष) पुत्र जन्मेजय सिंह उर्फ चंद्रभान खाना खाने के बाद अपराह्न साढ़े 3 बजे गांव के ही राणा ध्रुवनाथ सिंह के साथ घर पर बैठकर कैरम खेल रहा था। वहां पर विपिन कुमार सिंह पुत्र विष्णु सिंह व ध्रुवनाथ सिंह का भाई सोनू भी था।
करीब सवा पांच बजे बिपीन कुमार सिंह वादी के पुत्र शशांक को अमरूद खिलाने के बहाने प्राथमिक स्कूल ले गए। उनका पौत्र 7 शाम तक घर नहीं लौटा तो तलाश शुरू हुई। शशांक का सुनियोजित तरीके से अपहरण कर छिपा दिया गया था। 3 अगस्त 2004 को नाली में शशांक की लाश मिली। तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज हुआ है।
विवेचना में उसी गांव के राणा ध्रुवनाथ सिंह, सोनू उर्फ राणा रघुनाथ सिंह, चुन्नू उर्फ देवबहादुर सिंह पुत्रगण राणा समर बहादुर सिंह उर्फ लालजी सिंह, विजय बहादुर सिंह पुत्र रामदेव सिंह, राणा समर बहादुर सिंह उर्फ लालजी सिंह पुत्र रामदेव सिंह तथा बलिया जिला के चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के धर्मापुर निवासी आदित्य उर्फ विजेंद्र पुत्र परीखा को आरोपी बनाते हुए उनके विरूद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से 15 गवाह पेश किये गए। अदालत ने अभियोजन पक्ष एवं बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद राणा ध्रुवनाथ सिंह और सोनू उर्फ रघुनाथ सिंह को धारा 302, 364, 201 के तहत दोष सिद्ध करार देते हुए दोनों सजा सुनाई।