संवाद न्यूज एजेंसी
- बारा घाट पर नियमानुसार अक्टूबर में ही बन जाना था पीपा पुल
- पीपा पुल नहीं होने से ग्रामीणों को तय करनी पड़ रही लंबी दूरी
बारा। बिहार सीमा पर स्थित बारा गंगा घाट पर अब तक पीपा पुल न बनने से ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं, खेती किसानी करने वाले किसानों को भी बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शासन के नियमानुसार अक्टूबर में पीपा पुल बन जाता है जो कि 15 जून को खोल दिया जाता है। अब मार्च माह शुरू हो चुका है। फिर भी बारा पीपा पुल अब तक नहीं बना। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण गुफरान खान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य ओमकार यादव, सैयद जावेद, हैदर खान, एजाज खान, संजय पांडेय, रविंद्र श्रीवास्तव, मोहनलाल वर्मा, शुभम राय, जयप्रकाश राय, हाजी अबुसालेह खान, डॉक्टर सरफराज खान, फकरुद्दीन खान आदि का कहना है कि 14 अक्टूबर को पीपा पुल बनकर तैयार हो जाना चाहिए।
अब तो पीपा पुल टूटने की तारीख में दो -ढाई महीने बचे हैं, लेकिन बारा गंगा घाट पर पीपा पुल अब तक नहीं बना। मात्र इतने दिनों के लिए सरकार का पुल के मद में करोड़ों खर्च करने का क्या औचित्य है। हां, कुछ अधिकारी और ठेकेदार फायदा उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि हम लोगों के साथ प्रशासन छलावा कर रहा है।
000
पीपा पुल निर्माण के लिए व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। पीपा, नई लकड़ियां, प्लेट आदि मंगाई जा चुकी हैं। शासन से प्रांतीयकरण का कार्य पूरा होते ही टेंडर और ठेका का कार्य कराकर पुल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - अमित यादव, जेई