आरोप है कि पारस नाथ सिंह ने अवधनारायण सिंह से साठ-गांठ करके अकारण कुबेर नाथ सिंह को गिरफ्तार करके मारा-पीटा। साथ ही उनके विरुद्ध फर्जी मुकदमे पंजीकृत कर झूठा सबूत बना चालान कर दिया।
वादी हरिकेश सिंह ने उच्चधिकारियों शिकायत की तो मुकदमा मरदह थाने में दर्ज हुआ। विवेचना सीबी सीआईडी ने की और दोषियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। जिसमें से न्यायालय में आरोपी सुदामा यादव, ईश नारायण, धर्मदेव तिवारी और भीम सेन का विचारण शुरू किया।
अभियोजन की तरफ से कुल 7 गवाहों को पेश किया। शनिवार को दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने चारों आरोपियों को सजा सुनाई। आरोपियों ने अपील दाखिल करने के लिए न्यायालय में जमानत आवेदन दिया, जिसपर न्यायालय ने चारों आरोपियों को जमानत बंध पत्र पर देर शाम रिहा कर दिया।
साथ ही साथ न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन वाद का निस्तारण कराने में दोनो तरफ के अधिवक्ता को धन्यवाद।